World Environment Day 2021 : विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर जानिए पर्यावरण का अर्थ, महत्व और इतिहास

दुनियाभर में हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) लोगो को जागरूक करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा 1972 में की गई थी। 5 जून से लेकर 16 जून 1972 तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में इस दिन को मनाने को लेकर चर्चा की गई थी। जिसके बाद इस दिन को मनाने की घोषणा की गई है। विश्व पर्यावरण दिवस लगभग 100 से भी अधिक देशों के लोगों के द्वारा 5 जून को मनाया जाता है।
5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day 2021 Wishes) मनाया गया। यही नहीं हर साल इसे मनाने के लिए एक थीम भी रखी जाती है सन 2016 मे विश्व पर्यावरण दिवस द्वारा कहा गया “जीवन के लिए जंगली बनो” ताकि वन्यजीवों के प्रति अपराध में शामिल लोगों को सुधार सकें और उनके द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई कर सकें और साल 2021 में इसके लिए ‘पारिस्थितिकी तंत्र बहाली’ थीम रखी गई है। इस दिन पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए कई तरह के जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और लोगों को पेड़-पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस साल पाकिस्तान विश्व पर्यावरण दिवस की वैश्विक मेजबानी करेगा।

लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता लाने के लिए अन्य प्रकार की प्रदर्शनियों को भी आयोजित किया जाता है। जिसमे विभिन्न क्रियाए जैसे, निबंध लेखन, पैराग्राफ लेखन, भाषण, नाटक का आयोजन, सड़क रैलियाँ, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, कला और चित्रकला प्रतियोगिता, परेड, वाद-विवाद, आदि शामिल हैं। यह कार्यक्रम इस पृथ्वी की सुन्दरता को बनाए रखने के लिए कुछ सकारात्मक गतिविधियों के लिए एकसाथ कार्य करने की एक पहल है। इस दिन सार्वजनिक अवकाश नहीं होता इस प्रकार सभी स्कूल और कार्यालय खुले रहते हैं और कोई भी अवकाश नहीं लेता है।

पर्यावरण का अर्थ
पर्यावरण को अंग्रेजी भाषा में “Environment” जो फ्रेंच शब्द ‘Environ’ से बना है । Environ का आशय आस – पास के आवरण से है । हिन्दी में Environment को पर्यावरण कहते है। ‘पर्यावरण’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। परि + आवरण = पर्यावरण। अर्थात् चारों ओर विद्यमान आवरण। पर्यावरण का अर्थ उन सभी प्राकृतिक दशाओं एवं वस्तुओं से लिया जाता है जो हमारे चारों ओर व्याप्त हैं। ये वस्तुएँ हैं – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति व जीव – जन्तु।

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास
विश्व पर्यावरण दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानव पर्यावरण के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अवसर पर 1972 में हुई थी। हालांकि, यह अभियान सबसे पहले 5 जून 1973 को मनाया गया। यह प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है और इसका कार्यक्रम विशेष रूप से, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किए गए वार्षिक विषय पर आधारित होता है।

पर्यावरण से खिलवाड़ 
प्रकृति ने समस्त जीवों की उत्पत्ति एक ही सिद्धांत के तहत की है। वह समस्त चर-अचर जीवों के अस्तित्व को एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब मनुष्य ने स्वयं को पर्यावरण का हिस्सा ना मानकर उसको अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विकृति करने लगा। इन गतिविधियों ने प्रकृति के रूप को पूरी तरह बिगाड़ दिया। नदियां, पहाड़, जंगल और जीव पृथ्वी पर चारों तरफ जो नजर आते थे इनकी संख्या घटती गई। इनमें से ढेरों विलुप्त के कगार पर हैं। ऐसा लगता है कि इंसान समाज ने प्रकृति के विरुद्ध एक अघोषित युद्ध छेड़ रखा है और स्वयं को प्रकृति से अधिक ताकतवर साबित करने में जुटा हुआ है। यह जानते हुए भी कि प्रकृति के विरुद्ध युद्ध में वह जीत कर भी अपना वजूद सुरक्षित नहीं रख पाएंगे।

पर्यावरण दिवस का महत्व
पर्यावरण में फैला प्रदूषण धीरे-धीरे वैश्विक संकट बनते जा रहा है। जिसके प्रति लोगों को जागरूक करने का दिन ही है प्रकृति दिवस। इसके खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए ही इस दिन की शुरुआत की गई। प्रदूषण से पृथ्वी से लेकर वायु मंडल व इस पर रहने वाले सभी जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। वनों की अनियंत्रित कटाई इसका मुख्य कारण है। जिसके परिणाम स्वरूप बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग, चक्रवात, बाढ़, तूफान आदि का खतरा दुनिया पर मंडरा रहा है। वैज्ञानिक व पर्यावरणविद् लगातार इसे लेकर लोगों को जागरूक होने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में सभी को जरूरत है पौधारोपण करने की। यदि एक पेड़ काटते हैं तो अपने लिए न सही अपनी आने वाले पीढ़ी के लिए सैकड़ों पौधे लगाएं।

दरअसल, कुछ दशकों से हमारा पर्यावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है। जिससे इस पर रहने वाले जीव-जंतु, जलवायु समेत सभी चीजें प्रदूषित हो रही है। जिससे सबके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का एकमात्र उद्देश्य है कि लोगों को इसके प्रति जागरूक करना। ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करें ना की पेड़ों की कटाई। जिस तरह से देश में विकास हो रहा है, कंस्ट्रक्शन किए जा रहे हैं उसके बदले कई पेड़ पौधे की कटाई बड़ी मात्रा में कर दी जा रही है। ऐसे में यह जीवनदायिनी पेड़-पौधे ही अगर नहीं रहेंगे तो हम या हमारी आने वाली पीढ़ी कैसे रहेगी। ऐसे में हमें एकजुट होकर इसे गंभीरता से लेना होगा। वन प्रबंधन, ग्रीन हाउस गैस को नियंत्रण करना, पनबिजली संयंत्र का उपयोग या सोलर ऊर्जा के इस्तेमाल करने से ही हमारा वातावरण शुद्ध हो सकता है।

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