इस्लाम धर्म में हरे रंग को जन्नत का प्रतीक क्यों माना जाता है, जानिए इस्लाम में क्या है इसका महत्व

हिन्दू धर्म में केसरिया रंग को शुभ माना जाता है, उसी तरह इस्लाम धर्म में हरा रंग बहुत पवित्र माना जाता है। सनातन धर्म में केसरिया रंग को शुभ कहने के पीछे यह माना जाता है केसरिया रंग सूर्य, मंगल और बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही केसरिया रंग मानसिक शांति प्रदान करता है। उसी प्रकार केसरिया रंग सिख और बौद्ध धर्म में भी पवित्र माना गया है।
इसके साथ ही इस्लाम धर्म से जुड़ी रचनाओं में ऐसा कहा गया है कि हरा रंग जन्नत का प्रतीक है क्योंकि वहां रहने वाले लोग हरे रंग के वस्त्र पहनते हैं।

इस्लाम में हरे रंग का महत्त्व
इस्लाम धर्म में हरे रंग का बहुत महत्व है। दरगाह की चादर से लेकर झंडे तक सब कुछ हरे रंग का होता है। दरअसल, माना जाता है कि इस्लाम धर्म की स्थापना करने वाले पैगंबर मोहम्मद हमेशा हरे रंग के कपड़े पहनते थे। उनका मानना था कि हरा रंग खुशहाली, शांति और समृद्धि का प्रतीक है। यानि हर धर्म में अपनी शांति का प्रतीक होता है जो इस्लाम में हरा है।

हिन्दू धर्म में केसरिया रंग का महत्व
सनातन धर्म के अनुसार केसरिया रंग सूर्य, मंगल और बृहस्पति जैसे ग्रहों का प्रतिनिधित्व करता है। केसरियां की मान्यता है कि इस रंग को अग्नि से लिया गया। इसी के साथ माना जाता है कि केसरिया रंग मन को शांति प्रदान करता है।
इतना ही नहीं केसर‍िया रंग बौद्ध और सिख धर्म में भी पवित्र माना गया है। सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु गोबिंद सिंह की कुर्बानी और याद के स्वरुप में इस रंग को महत्वपूर्ण माना गया है। गुरु गोबिंद सिंह के पवित्र निशान ‘निशान साहिब’ को भी केसरिया रंग में ही लपेट के रखा गया है।

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