हिंदू धर्म में महिलाएं क्यों लगाती हैं मांग में सिदूंर?? जानिए इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

सनातन धर्म के अनुसार सुहागिन स्त्रियों का मांग में सिंदूर लगाना अनिवार्य होता है। सिंदूर से मांग ना भरना अपशकुन माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं ऐसा क्यूं होता है? ऐसा कहा जाता है कि मांग भरने से पति की आयु बढ़ती है, स्त्री के सौभाग्य में वृद्धि होती है। सुहागिन महिलाएं आमतौर पर अपनी मांग में लाल या महरून रंग का सिंदूर लगाती हैं। भारतीय समाज में इसे विवाहित होने की निशानी माना जाता है।

आइए जानते हैं इस परंपरा से जुड़ी पौराणिक बातें…

सिंदूर लगाने की परंपरा का प्रमाण रामायण काल में मिलता है। कहा जाता है कि माता सीता रोज श्रृंगार करते समय मांग में सिंदूर भरती थीं। ऐसा उल्लेख मिलता है कि एक दिन हनुमान जी ने माता सीता से पूछा कि वे रोज सिंदूर क्यों लगाती हैं?पति की आयु बढ़ती है सीता ने बताया कि भगवान राम को सिंदूर पसंद है। इससे उन्हें प्रसन्नता होती है। जितनी बार वे सीता की मांग में सिंदूर देखते हैं, उतनी बार उनका मन प्रसन्न होता है। प्रसन्नता शरीर और स्वास्थ्य के लिए वरदान है और स्वस्थ रहने से व्यक्ति की आयु बढ़ती है। इस तरह सिंदूर लगाने से पति की आयु बढ़ती है। माता सीता से ऐसे मधुर वचन सुन हनुमान जी का मन प्रसन्न हो गया और इसी समय से सुहागिनों में सिंदूर से मांग भरने का प्रचलन हो गया।

वैज्ञानिक आधार पर सिंदूर क्यों लगाना चाहिए?
विज्ञान कहता है कि स्त्रियों के मस्तिष्क का मध्य भाग बहुत कोमल होता है, वहीं सिंदूर या कुमकुम में अधिक मात्रा में ऊर्जा होती है जो सिर के मध्य में लगने से मस्तिष्क को शक्ति मिलती है। सिंदूर के लगने से मस्तिष्क में गर्मी आती है और ऊर्जा का संचार एवं संग्रह होता है। इसी कारण से सुहागिन स्त्रियों को मांग में सिंदूर और कुमारी लड़कियों को कुमकुम का टीका अपने माथे पर जरुर लगाना चाहिए।

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