सुहागरात के दिन क्यों दी जाती है महिलाओं को तोहफा

हर कपल अपनी शादी या कहें कि अपनी फर्स्ट नाइट के लिए काफी उत्सुक होते है। शादी की पहली रात को सुहागरात कहते है। शादी से पहले ही कपल्स अपनी फर्स्ट नाइट के लिए कई सारी प्लानिंग शुरू कर देते हैं। शादी की पहली रात हर किसी के जीवन में खास होता है जो दो लोग एक दूसरे से विवाह कर के एक दूसरे के साथ जीवन भर साथ रहने की कसमें खाते है उन दोनों के अंदर एक दूसरे के लिए बहुत सारे सवाल भी होते हैं इस रात महिलाओं और पुरुषों दोनों के अंदर समान उत्सुकता रहती हैं। लड़कियों की बात करें तो उनमें शादी की पहली रात की उत्सुकता काफी देखी जाती है। इस दौरान वह काफी उत्साहित और बचैन रहती हैं। उनके मन में ससुराल जाने का डर और फर्स्ट नाइट की उत्सुकता रहती है। 

 ऐसे में सुहागरात के दिन पति अपनी पत्नी को कोई न कोई तोहफा जरूर देता है 

सुहाग रात में  ये रिवाज होता है दुल्हन को मुंह दिखाई देने का। ऐसी कथा है कि सुहागरात में ही भगवान राम ने देवी सीता को वचन दिया था कि वह एक पतिव्रत रहेंगे। इसी वचन के कारण भगवान राम ने दूसरी शादी नहीं कि और देवी त्रिकूटा भगवान के कल्कि अवतार की प्रतिक्षा में बैठी है। तभी से ये परम्परा चलता आ रहा है कि हर पति को सुहागरात के दिन अपनी पत्नी को कोई न कोई तोहफा जरूर देना होता है। तोहफा छोटा हो या बड़ा पर आप जो भी तोहफा देंगे वो तोहफा पत्नी को ज़िन्दगी भड़ याद रहती हैं और आज कल दुल्हन को इस रिवाज के तहत गहने, मोबाइल जैसे उपहार मिलने लगे हैं। 

दरअसल इस रिवाज के पीछे यह विश्वास होता है कि स्त्री जिसे अपने पति के रूप में स्वीकार कर रही है वह इस योग्य है कि उसकी जरुरतों को पूरा कर सके।  वो एक दूसरे से बातों का भी शुरुआत करते है। व्यवहारिक तौर पर देखा जाए तो उपहार देने के पीछे यह उद्देश्य होता है कि नए रिश्ते की शुरुआत अच्छी हो और इस दौरान वो एक दूसरे के पसंद न पसंद को जान लेते है। 

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