गेहूं की फसल पर पड़ी मौसम की मार, उत्पादन में 10 फीसदी की कमी

बिहार के भागलपुर जिले के दक्षिणी इलाके में मौसम की मार गेहूं की फसल पर पड़ी है बारिश नहीं होने और सिंचाई की समस्या के कारण गेहूं का दाना सिकुड़ गया है। कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार इससे गेहूं के उत्पादन में 10 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
मौसम का असर गेहूं के उत्पादन पर पड़ा है। खासकर पिछात बुआई करने वाले किसानों को इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है। गर्मी और पछुआ हवा के कारण कुछ जगहों से गेहूं के दाने में सिकुड़न की शिकायत है।
कृषि अधिकारियों का कहना है कि गर्मी पहले आ जाने के कारण खेतों की नमी सूख गई और पछुआ हवा चलने के कारण दाना में सिकुड़न आ गई। इस कारण उत्पादन पर असर पड़ रहा है। गेहूं की कटाई शुरू हो गई है, बुधवार तक जिले में लगभग 30 प्रतिशत कटाई हो गई है।
पिछले साल गेहूं अच्छादन का लक्ष्य 45000 हेक्टेयर था वहीं इस साल गेहूं का अच्छादन लक्ष्य 43867 हेक्टेयर था। कृषि कर्मियों का कहना है कि पिछले साल मौसम अनुकूल नहीं होने के बावजूद शत प्रतिशत अच्छादन हो गया था, लेकिन इस बार सिंचाई की सुविधा होने के बावजूद रकबा घट गया है। इसके अलावा मौसम की प्रतिकूलता भी हो गई। इन दोनों कारणों से जिले में गेहूं का उत्पादन कम हो सकता है। पिछले साल 28 से 31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गेहूं का उत्पादन लक्ष्य रखा गया था। हालांकि उत्पादन उससे भी अधिक हुआ था। 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गेहूं की उपज हुई थी। इस साल 32.5 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
50-50 वर्गमीटर में गेहूं की कटाई कराने के बाद पाया गया कि गंगा के उत्तरी हिस्से में 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं की उपज है, जबकि गंगा के दक्षिणी हिस्से में लगभग 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज पायी गई है। इससे पता चला है कि गंगा के उत्तरी इलाके में गेहूं की फसल लगभग ठीक है, लेकिन दक्षिणी इलाके में उपज लक्ष्य के अनुरूप नहीं है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी कुछ और जगहों पर हार्वेस्टिंग सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद पता चलेगा कि जिले में गेहूं का औसत उत्पादन कितना है।

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