गाजीपुर बॉर्डर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं और किसानो के बीच हिंसक झड़प, मौके कर पहुंची पुलिस स्थिति को किया नियंत्रित

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर बुधवार दोपहर 12 बजे के करीब करीब किसानों और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेताओं के बीच विवाद हुआ जो बाद में इतना बढ़ गया की हाथापाई शुरू हो गई। जिसके बाद से दोनों पक्षों से लोग आए और जमकर पथराव किया, गाड़ियों के शीशे तोड़े गए। हालांकि पुलिस ने समय पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया है।

बताया जा रहा है कि बीजेपी के कार्यकर्ता गाजीपुर बॉर्डर पर बीजेपी से जुड़े एक नेता का स्वागत करने के लिए पहुंचे थे, लेकिन यहां एकाएक बवाल शुरु हो गया। बीजेपी समर्थकों का आरोप है कि किसानों ने हंगामा और पथराव शुरू कर दिया। हालात इतने खराब होते गए कि बीजेपी नेता की गाड़ी को वहां से निकालने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। जिसके बाद किसान और बीजेपी समर्थक आपस में भिड़ गए।

पूरी घटना पर किसान नेता राकेश टिकैत ने बीजेपी पर कई संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजेपी नेता हमारे मंच पर आए थे और अपने नेता का स्वागत करने लगे थे, यह गलत है। 

टिकैत ने धमकी भरे स्वर में कहा कि –

“मंच सड़क पर है तो इसका मतलब ये नहीं है कि मंच पर आ जाओगे, अगर मंच पर आना है तो बीजेपी छोड़कर आओ, लेकिन यह दिखाना कि हमने गाजीपुर के मंच पर भाजपा का झंडा फहरा कर कब्जा कर लिया, यह गलत है, ऐसे लोगों के बक्कल उधेड़ दिया जाएगा, प्रदेश में फिर कहीं भी नहीं जा सकते हैं, याद रख लेना।

अगर मंच पर झंडा लगाकर कब्जा करेंगे तो उनका इलाज करेंगे, हां मैं धमकी दे रहा हूं, मंच पर कब्जा करके किसी का स्वागत करेंगे, पुलिस की मौजूदगी में बीजेपी के लोग मंच पर कब्जा करना चाहते थे, अगर मंच इतना प्यारा है तो इस आंदोलन में शामिल हो जाओ, ऐसी बीमारी क्यों है।”

वहीं भारतीय किसान यूनियन ने ट्वीट कर लिखा, “भाजपा के कार्यकर्ताओं ने आज गाजीपुर बॉर्डर पर फ्लाईवे के बीच मंच के पास भारी संख्या में इकट्ठे होकर किसी नेता के स्वागत के बहाने ढोल बजाकर आंदोलन विरोधी नारे लगाए, भाकियू कार्यकर्ताओं के मना करने लाठी डंडों से हमला किया, जिसमे किसान घायल हुए हैं।”

किसान यूनियन ने ट्वीट कर आगे लिखा की भाजपा अब आंदोलन को हिंसा से तोड़ना चाहती है जिसका उदाहरण आज की गाजीपुर बॉर्डर पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा है, सभी किसानों से अनुरोध है इनके बहकावे में ना आएं और अपने आंदोलन को बचाए रखें।

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