केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक नवाचार में शिक्षा क्षेत्र और उद्योग के लिए एक संस्थागत तंत्र विकसित करने का किया ऐलान

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी मंत्रालय): विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने नई दिल्ली में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसन्धान परिषद (सीएसआईआर विज्ञान) की शैक्षणिक उप-समिति को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक नवाचार में शिक्षा क्षेत्र (अकादमिक) और उद्योग को आवश्यक हितधारक बनाने के लिए एक संस्थागत तंत्र विकसित किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक मजबूत आईपी पोर्टफोलियो के साथ वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित संगठन होने के नाते विश्वविद्यालयों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकता है और इस साझेदारी से न केवल विश्वविद्यालयों और सीएसआईआर को लाभ होगा बल्कि इससे प्रेरित होकर उद्योग नए आविष्कारों और नवाचारों को लाकर विकास को भी गति दे सकेंगे।

उन्होंने सीएसआईआर से इनोवेशन पार्क जैसे जुड़ाव के उपयुक्त मॉडल लाने का आह्वान किया, जहां एक ओर यह विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय संस्थानों के उत्कृष्ट मौलिक अनुसंधान का लाभ उठाएगा वहीं दूसरी ओर यह प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक प्रयोगों और प्रसार में उद्योगों को मजबूत करेगा। उन्होंने आगे कहा कि इससे अंतःविषयी और परस्पर अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा जिससे अंततोगत्वा नवाचार के अनुपात को प्रोत्साहन भी मिलेगा।

कोविड-19 को नियंत्रित करने के मोर्चे पर में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसन्धान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा निभाई गई विशिष्ट भूमिका का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश ने हाल ही में 100 करोड़ टीकाकरण तक पहुंचने का महत्वपूर्ण पड़ाव देखा है। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में उल्लेखनीय है और देश भर में हमारे वैज्ञानिक समुदाय, उद्योग, डॉक्टरों और अनगिनत स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों के ‘कर सकते हैं’ वाली इच्छा शक्ति का एक प्रमाण है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एसएआरएस–सीओवी-2 के में वायु में संचरण को कम करने से संबंधित मुद्दों का समाधान करने में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसन्धान परिषद के हालिया प्रयास की भी सराहना की जिसके अंतर्गत भारत की संसद में इसकी प्रौद्योगिकी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर ने पीपीई सूट के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के लिए एक नई पहल भी शुरू की है, और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के साथ साझेदारी में सीएसआईआर- राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) द्वारा पुणे में एक पायलट परीक्षण भी स्थापित किया गया था।

उन्होंने आग्रह किया कि इसे उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और अन्य सम्बन्धित पक्षों के साथ साझेदारी में बड़े पैमाने पर किया जाना चाहिए क्योंकि पीपीई कचरे का निपटान एक बहुत बड़ी चुनौती है और सरकार के कचरे से सम्पदा (वेस्ट टू वेल्थ) जनादेश की प्रतिबद्धता को पूरा करना एक उच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसन्धान परिषद (सीएसआईआर) – भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) प्रौद्योगिकी द्वारा विकसित पीवीएसए प्रौद्योगिकी पर आधारित मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन (एमओ2) कंसेंट्रेटर सिस्टम की 108 इकाइयां पीएम केयर्स से वित्त पोषण के साथ स्थापित की गईं और सीएसआईआर द्वारा इन्हें बहुत ही कम समय में चालू भी कर दिया गया।

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