केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अरुणाचल प्रदेश में पूर्वोत्तर आदिवासियों के लिए की जैव प्रौद्योगिकी केंद्र की स्थापना

नई दिल्ली, 10 नवंबर (केंद्रीय विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी मंत्रालय): केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आदिवासी लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए बुधवार को अरुणाचल प्रदेश के सुदूर इलाके में पूर्वोत्तर आदिवासियों के लिए एक नए जैव प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने अरुणाचल प्रदेश राज्य को जैव प्रौद्योगिकी में डीबीटी फंडेड कौशल विज्ञान कार्यक्रम भी समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि, जैव संसाधन और सतत विकास केंद्र ने इन कार्यक्रमों के कुशल कार्यान्वयन के लिए कई आईसीएआर, सीएसआईआर संस्थानों के साथ अकादमिक संबंध भी स्थापित किए हैं क्योंकि वे अरुणाचल प्रदेश राज्य के संभावित युवा उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए सुविधाएं अरुणाचल प्रदेश के 4 जिलों में स्थापित की जाएंगी, जिसमें 50 से अधिक गांव शामिल होंगे और अगले 2 वर्षों में 10,000 से अधिक किसानों को लाभ होगा।

डॉ जितेन्द्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस क्षेत्र के वैज्ञानिक उत्थान के लिए अरुणाचल प्रदेश के पापुम पारे जिले में किमिन में जैव संसाधन और सतत विकास केंद्र की स्थापना की गई है। इसे अरुणाचल प्रदेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से बनाया गया है। केंद्र को 27 मार्च, 2018 को शुरू में 3 साल की अवधि के लिए कुल 54.23 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। परियोजना का कार्यकाल अब 26 सितंबर 2023 तक बढ़ा दिया गया है।

उन्होने कहा कि, यह कार्यक्रम स्किल इंडिया मिशन के दायरे में है जिसके माध्यम से डीबीटी इस कार्यक्रम को संचालित करने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) और विभिन्न भागीदार संस्थानों के कौशल विकास परिषदों के साथ तालमेल बिठाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम कौशल विज्ञान के साथ तालमेल बनाने और सरकार की विज्ञान पहल में तेजी लाने की दिशा में केंद्रित प्रयास है। इसका उद्देश्य प्रमुख एसटीआई डोमेन में युवाओं की क्षमता निर्माण सहित गुणवत्तापूर्ण नौकरी के अवसर पैदा करना है। इसके साथ-साथ उद्यमिता विकास के लिए जीवन विज्ञान/ जैव प्रौद्योगिकी में युवा स्नातकों के लिए करियर पथ के विकास की सुविधा प्रदान करना है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से चार अलग-अलग प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यान्वित किए जा रहे हैं जिनमें (1) छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रम (एसटीपी), (2) तकनीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीटीपी), (3) संकाय प्रशिक्षण कार्यक्रम (एफटीपी) और (4) उद्यमिता विकास कार्यक्रम शामिल हैं (ईडीपी)।

एनएसडीसी-एमएसडीई की तीन अलग-अलग कौशल विकास परिषद (एसडीसी) इन प्रशिक्षणों के हिस्से के रूप में हैं और विभिन्न पैटर्निंग संस्थानों के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश राज्य के लिए कौशल विज्ञान कार्यक्रम को लागू करने के लिए उनके समर्थन को बढ़ाने के लिए एपीसीएसएंडटी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

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