संक्रमण का उपचार होगा आसान

नवनीत कुमार गुप्ता
अक्सर हम सुनते आए हैं कि एक बार बीमारी की जड़ पकड़ में आ जाए तो ईलाज आसान हो जाता है। चिकित्सा जगत में भी शोधकर्ता यही प्रयास करते हैं कि बीमारी के कारण को जितना अधिक समझा जाए उतना अच्छा। इस दिशा में प्रयास करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) के शोधकर्ताओं ने डिसुलफिरम दवा की अभिनव क्रियाविधि को समझा है।

प्रोफेसर रंजना पठानिया के नेतृत्व में शोध दल ने पाया कि डिसुलफिरम दवा मेटालो-बीटा-लैक्टामेज के सामान्य कामकाज को रोक सकती है, यह एक एंजाइम कार्बापेनम एंटीबायोटिक दवाओं को बेअसर करता है। इस प्रकार डिसुलफिरम कार्बापेनम-प्रतिरोधी एसिनेटोबैक्टर बॉमनी के खिलाफ एंटीबायोटिक दवाओं के कार्बापेनम वर्ग की जीवाणुरोधी गतिविधि में सुधार करती है। यह शोध आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज और बायोइीजीनियरिंग विभाग की मॉलिक्यूलर बैक्टीरियोलॉजी और केमिकल जेनेटिक्स प्रयोगशाला के प्रो. रंजना पठानिया, विनीत दुबे, कुलदीप देवनाथ, मंगल सिंह द्वारा किया गया। यह शोध कार्य ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबियल कीमोथेरेपी में प्रकाशित किया गया है।

एसिनेटोबैक्टर बॉमनी दुनिया भर के अस्पतालों में एक गंभीर समस्या है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह उन रोगियों में संक्रमण के प्राथमिक कारणों में से एक है जो अस्पताल के वेंटिलेटर और मूत्र कैथेटर जैसे उपकरणों पर निर्भर होते हैं। 63 प्रतिशत संक्रमण इस जीवाणु के बहुऔषध-प्रतिरोधी उपभेदों के कारण होते हैं, जो एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति इसके बढ़ते प्रतिरोध के कारण प्राथमिक चिंता का विषय है। चूंकि इन रोगजनकों में कार्बापेनम डिग्रेडिंग एंजाइम होते हैं, इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2017 में नई उपचार दवाओं के अनुसंधान और विकास के लिए इस रोगज़नक़ को एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में नामित किया है।

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. अजीत के चतुर्वेदी ने कहा, “एंटीबायोटिक प्रतिरोधी माइक्रोबियल संक्रमण दुनिया भर में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। यह शोध आशा की एक किरण है जिसने रक्त, मूत्र पथ, फेफड़ों के संक्रमण के उपचार के रास्ते खोल दिए हैं। ऐसे रोगजनकों के कारण घाव और शरीर की अन्य साइटें।”

इस शोध की प्रधान अन्वेषक और आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर रंजना पठानिया ने बताया कि “डिसुलफिरम एफडीए द्वारा अनुमोदित एक दवा है, जो पुरानी शराब के मामलों में रोगियों को संयम विकसित करने में सहायता करने के लिए एक निवारक के रूप में निर्धारित है। टीम ने कार्बापेनम मोनोथेरापी की तुलना कार्बापेनम थेरेपी के साथ डिसुल्फिरम के साथ मेटालो-बीटा-लैक्टामेज इनहिबिटर के रूप में की, जहां संयोजन समूह ने चूहों के ऊतकों में बैक्टीरिया के बोझ को कम करने में सुधार दिखाया।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending