बरसात के मौसम में खूब तेजी फैलती है ये बीमारी, जानें लक्षण और बचाव के उपाय

बरसात के मौसम में तरह-तरह की बीमारियों का शिकार होना आम बात है। यही नहीं ये खतरा कभी-कभी इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि व्यक्ति डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि जैसी बीमारियों कि चपेट में आ जाता है। इसके अलावा ज्यादातर लोगों को बारिश के मौसम में बुखार की सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ती है।

दरअसल ये बुखार तब होता है बारिश के मौसम में चलने वाली हवाओं के साथ-साथ धूल में फूलों और घास-फूस के कण मिलकर शरीर पर हमला करते हैं। जिन लोगों को धूल, परागण से एलर्जी होती है, उन्हें ‘हे फीवर’ ज्यादा परेशान करता है। आइए जानते हैं बारिश के मौसम में बुखार होने के लक्षण और इससे बचाव के कुछ उपाय।

बारिश में बढ़ जाता है फीवर का खतरा? 

यूं तो बुखार कभी भी किसी को भी हो सकता है, लेकिन हे फीवर एक किस्म की एलर्जी से होने वाली बीमारी है। विशेषज्ञ का कहना है बारिश से एलर्जी की समस्या ज्यादा बढ़ सकती है। दरअसल, तेज बारिश होने पर फूलों से पराग कण निकल कर हवा में मिल जाते हैं और ऐसे में ‘हे फीवर’ का खतरा बढ़ जाता है। 

इसके अलावा विशेषज्ञ का कहना है कि ‘हे फीवर’ से जूझ रहे लोगों को खुली हवा में निकलने से बचना चाहिए, नहीं तो ये परेशानी विकराल रूप ले सकती है। दरअसल, दिन में हवा गर्म होने से परागण ऊपर हवा में उठ आते हैं, जबकि रात में तापमान गिरने पर ये जमीन पर बैठ जाते हैं। अगर आपके आसपास ज्यादा परागण वाले पौधे हैं, तो उससे परेशानी और बढ़ जाएगी। 

इस बुखार होने के लक्षण

-लगातार छींक आना 
-नाक और शरीर में खुजली
-गले में खराश 
-नाक बहना 
-आंख से पानी आना 
– ज्यादा थकान महसूस होना 

यहां जानिए इस बुखार से बचाव के उपाय…

-हे फीवर से जूझ रहे लोगों को धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से बचना चाहिए। 
– जब भी घर से बाहर जाये तो मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढकें रहें।  
-रोएं वाले जानवरों से दूर रहे।
-अचानक गर्म से ठंडा और ठंडे से गर्म माहौल में नहीं जाएं।
– इस दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।  

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