खाने की तेल की कीमतों में आ सकती है कमी, सरकार ने उठाया जरूरी कदम

घर की रसोई में प्रयोग होने वाला खाने का तेल इन दिनों इतना महंगा हो गया है इसे खरीदने के लिए सोचना पड़ता है। दरअसल, खाने की तेल महंगा होने के कारण लोगों की जेब पर भी इसका साफ असर देखा जा रहा है। बात कर खाने की तेल की करें तो सरसों का तेल इस समय अपने उच्चतम स्तर पर हैं। सरसों का तेल इन दिनों बाजारों में 180 से ₹200 प्रति लीटर बिक रहा है। 

आम व्यक्ति के लिए 180 से 200 या फिर कहीं कहीं 210 रुपए प्रति  लीटर बिकने वाले सरसों तेल को खरीदना लोगों की बचत पर भी असर कर रहा है। इसी बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है की पाम तेल के बेस प्राइस में कटौती कर दी गई है। जबकि सोयाबीन तेल और सोना चांदी का बेस प्राइस बढ़ा दिया गया है।

कहने का अर्थ है कि सरकार खाने की तेल की कीमतों को कम करने के लिए एक बार फिर से कदम उठा रही है।सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक क्रूड और रिफाइंड पाम तेल के आधार आयात मूल्य घटा दिया गया है जबकि क्रूड सोया ऑयल के आयात मूल्य में बढ़ोतरी हो गई है। बताया जा रहा है कि सरकार के इस कदम से सोयाबीन का तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है जबकि पाम तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा सकती है। 

सरकार द्वारा हर पखवाड़े में खाद्य तेलों और सोना चांदी की आधार आयात मूल्य में बदलाव किया जाता है। बता दें कि इसी कीमत के आधार पर सरकार टैक्स का निर्धारण भी करती है। गौरतलब है कि इससे पहले सरकार द्वारा खाने के तेल कीमतें घटाने के लिए बड़ा ऐलान किया गया था। उस समय सरकार द्वारा सालाना 20 टन सोया तेल के आयात पर इंपोर्ट चार्ज समाप्त कर दिया गया था।

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