8वें भारत-स्वीडन नवाचार दिवस के उद्घाटन समारोह पर केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों को दी बधाई, कहा- हमारी ये साझेदारी दूरगामी परिणाम देगी

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय): मंगलवार को नई दिल्ली में भारत-स्वीडन नवाचार बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत और स्वीडन का सहयोग जीवाश्म ईंधन मुक्त अर्थव्यवस्था के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने में दूरगामी परिणाम देने वाला होगा। ‘भारत-स्वीडन हरित परिवर्तन को बढ़ावा’ विषय पर 8वें भारत-स्वीडन नवाचार दिवस में उद्घाटन भाषण देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा स्वीडिश ऊर्जा एजेंसी ने आगे बढ़ते हुए औद्योगिक अनुसंधान और विकास प्रस्तावों के लिए आह्वान किया, जिसमें 20 संयुक्त औद्योगिक प्रस्ताव मिले।

इन प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है और हम जल्द ही चयनित परियोजनाओं को लागू करने की स्थिति में होंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा स्वीडिश उद्यम और नवाचार मंत्रालय स्मार्ट सिटी, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, डिजिटलीकरण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग, सर्कुलर इकोनॉमी पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा की दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने 5 मार्च 2021 को अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान संयुक्त प्रयासों की घोषणा की थी जिसके परिणामस्वरूप 22 परियोजनाओं और तीन संयुक्त परियोजनाओं को वित्त पोषण के लिए दोनों पक्षों से अनुशंसित किया गया।

उन्होंने कहा कि आई सी एम आर इंडिया और स्वीडिश एफ ओ आर टी ई ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन संगठन तथा वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल जैसे व्यापक विषयों पर भी 2021-22 में संयुक्त रूप से व्यापक और नई शुरुआत करने पर सहमति व्यक्त की। डॉ. सिंह ने कहा कि इसके अलावा जैव प्रौद्योगिकी विभाग पहले से ही इन्क्यूबेटर कनेक्ट, डिजिटल हेल्थ केयर और ग्लोबल बायो इंडिया कार्यक्रमों के लिए स्वीडन के भागीदारों के साथ जुड़ा हुआ है और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा दे रहा है।

भारत-स्वीडन नवाचार दिवस समारोह के सफल 8 वर्षों के लिए भारतीय और स्वीडिश वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग, द्विपक्षीय साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी औपचारिक शुरुआत 9 दिसंबर 2005 को स्टॉकहोम में भारत-स्वीडन के बीच एक अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ हुई थी।

इस समझौते में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के प्रावधान हैं। इसके अंतर्गत वैज्ञानिकों, स्नातक छात्रों, शोध कर्मचारियों, प्रौद्योगिकीविदों, अन्य विशेषज्ञों और विद्वानों का आदान-प्रदान शामिल है। इस सम्मेलन में तन्मय लाल, स्वीडन और लातविया में भारत के राजदूत; क्लास मोलिन, भारत में स्वीडिश राजदूत; डॉ. रेणु स्वरूप, सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार; सुश्री दारजा इसाकसन, महानिदेशक, विनोवा; श्री संजू मल्होत्रा सीईओ इंडिया अनलिमिटेड और श्री रॉबिन सुखिया, महासचिव और अध्यक्ष स्वीडन-भारत व्यापार परिषद सहित दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending