कोविड-19 वायरस के स्पाइक प्रोटीन के एंडोडोमेन की आणविक संरचना हुयी स्पष्ट

नवनीत कुमार गुप्ता
आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने स्पेक्ट्रोस्कोपी और सिमुलेशन की मदद से कोविड-19 वायरस के सक्रिय प्रोटीन क्षेत्र की आणविक संरचना को दर्शाने में सफलता प्राप्त की है। टीम ने एक महत्वपूर्ण स्पाइक प्रोटीन के एक अनुभाग की संरचना का अध्ययन किया है जो वायरस को संक्रामक बनाता है।

यह अवलोकन हाल ही में एक अग्रणी जर्नल ‘वायरोलॉजी’ में प्रकाशित किया गया है। यह शोध कार्य आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रजनीश गिरी के निर्देशन में संपन्न हुआ। उनके इस कार्य में पीएच.डी. स्कॉलर श्री प्रतीक कुमार, सुश्री तानिया भारद्वाज और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ नेहा गर्ग सहयोगी रहे हैं।

कोविड-19 महामारी फैलाने वाले सार्स कोरोनावायरस 2 को यह नाम देने की वजह इसकी सतह पर स्पाइक्स हैं जो इसे एक क्राउन (या कोरोना) का रूप देते हैं। स्पाइक्स जिन प्रोटीन से बनते हैं वे इन वायरसों को संक्रमित जीव की मेजबान कोशिकाओं में प्रवेश में सहायक होते हैं।

अपने शोध के बारे में डॉ. रजनीश गिरी ने बताया कि, “एंडोडोमेन स्पाइक प्रोटीन का वायरस के अंदर वाला हिस्सा होता है। हमने इस हिस्से की आणविक संरचना को समझने के लिये अपनी प्रयोगशाला में अध्ययन किया। हम ने ये पाया कि इसकी आणविक संरचना कठोर नहीं होती है। बल्कि ये पाया कि एंडोडोमेन बहुत ही लचीला होता है।’’

डॉ. रजनीश गिरी ने यह भी बताया कि ‘‘किसी स्ट्रक्चर या संरचना के अभाव में यह वायरस के डार्क प्राटीयोम का हिस्सा है। इससे यह भी सुझाव मिलता है कि एंडोडोमेन अलग-अलग परिस्थितियों में पूरी तरह या अंशतः अव्यवस्थित संरचना को अपना सकता है। सार्स कोव-2 स्पाइक एंडोडोमेन के अध्ययन में हम ने कम्प्युटेशनल एल्गोरिद्म और प्रयोगशाला की तकनीकों का इस्तेमाल किया है। हम ने अब तक केवल अनुमान के तौर पर देखी गई सी-टर्मिनल क्षेत्र या एंडोडोमेन के संरचनात्मक लचीलापन का प्रमाण प्रस्तुत किया है।

वायरस के संक्रामक होने में स्पाइक प्रोटीन की अहमियत देखते हुए पूरी दुनिया में उनकी आणविक संरचना देखने हेतु काफी शोध किए जा रहे हैं। हालांकि अब यह ज्ञात है कि स्पाइक प्रोटीन का एक भाग ऐसा है जो वायरस की मुख्य बॉडी के बाहर होता है (एक्स्ट्राविरियन) जिसे एक्टोडोमैन कहा जाता है; एक भाग वायरस की झिल्ली (ट्रांसमेम्ब्रेन) को पार करता है; और एक भाग वायरस की संरचना (इंट्राविरियन) के अंदर होता है जिसे एंडोडोमेन कहा जाता है।

अधिकतर अध्ययन केवल एक्स्ट्राविरियन पर केंद्रित रहे हैं और स्पाइक प्रोटीन के ट्रांसमेम्ब्रेन और इंट्राविरियन भागों की बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। डा. गिरि की शोध टीम ने सीडी स्पेक्ट्रोस्कोपी और आणविक गतिशीलता सिमुलेशन से स्पाइक ग्लाइकोप्रोटीन के इंट्राविरियन भाग का आकार या रूप देखने की पुष्टि की है जिसे सी-टर्मिनल क्षेत्र या एंडोडोमेन भी कहा जाता है।

आईआईटी मंडी के पीएच.डी. स्कॉलरश्री प्रतीक कुमार ने इस शोध के बारे में बताते हुए कहा कि ‘‘हमारे निष्कर्ष वैज्ञानिक समुदाय के लिए मार्गदर्शक होंगे जो इसकी संरचनात्मक लचीलापन का ध्यान रखते हुए स्पाइक प्रोटीन के इस भाग को लक्ष्य बनाने वाली दवाइयों की खोज कर पाएगा।’’ उन्होंने बताया कि इस भाग का संरचनात्मक लचीलापन मेजबान सेल के अंदर कई नए लक्ष्यों की पहचान करने में सहायक हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप कोविड-19 और अन्य कोरोनावायरस के संक्रमण के बुनियादी विज्ञान को समझना आसान होगा।

शोधकर्ताओं ने प्रायोगिक अध्ययनों के साथ सिमुलेशन के परिणामों का सत्यापन किया और यह दर्शाया कि स्पाइक प्रोटीन का इंट्राविरियन भाग यानी एंडोडोमैन की संरचना अलग से आंतरिक रूप से अव्यवस्थित हिस्सा दिखती है। इसके अलावा, साल्वेंट आधारित अध्ययन भी इस एंडोडोमेन की संरचना की पुष्टि या आकार बदलने की क्षमता के संकेत देते हैं।

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