कृषि कानून को सुप्रीम कोर्ट द्वार गठित समिति ने बताया जरूरी, कल किसानों के साथ बैठक

तीन कृषि कानून को लेकर दिल्ली के बार्डरों पर किसानों का आंदोलन जारी है. किसान कृषि कानून को वापस लेने की अपनी मांग पर अड़े है और किसानों की केंद्र की मोदी सरकार से कई बार बातचीत के बाद भी इस मसले पर कोई हल नहीं निकल पाया है. हाल ही में जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था तो सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानून पर फिलहाल रोक लगाते हुए इसकी समीक्षा के लिए एक समीति गठित कर दी थी जिसकी बैठक नई दिल्ली में मंगलवार को हुई. इस दौरान समीति के सदस्यों ने कृषि कानून को लेकर आगे की रणनीति की चर्चा की. समिति के सदस्य और अध्यक्ष शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल धनवट ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में सुधार की वर्तमान में काफी ज्यादा आवश्यक है. उन्होने कहा कि अगर कृषि कानून को अभी वापस लिया जाता हैं तो आने वाले 50 वर्षो तक कोई राजनीतिक पार्टी कृषि सुधार के लिए प्रयास नहीं करेगी. धनवट ने बताया कि पिछले 70 वर्षो में कृषि क्षेत्र के लिए जो कानून बनाए गए थे वे किसानों के हित में नहीं थे और इस दौरान लगभग 4.5 लाख किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होने कहा कि किसान दिन – प्रतिदिन कर्ज के बोझ के तले दबते जा रहे हैं. समिति की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान समिति के एक अन्य सदस्य पीके जोशी ने निष्पक्ष होकर काम करने की बात कही. उन्होने कहा कि हम निष्पक्ष होकर काम करेंगे और किसान संघों का विचार सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेंगे. मीडिया से बातचीत के दौरान सीमिति के सदस्य अनिल धनवट ने बताया कि समिति उन सभी किसानों से बात करेगी जो कृषि कानूनों का विरोध कर रही है. आपको बता दे कि कृषि कानून की समीक्षा के लिए गठित सीमति की कल बैठक होने जा रही हैं जिस पर सभी की नजरें  टिकी हुई हैं.

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