धरना स्थल पर रोजाना दम तोड़ रहे आंदोलनकारी किसान, विरोध की जिद मे नही लगा रहे वैक्सीन, अब 26 मई को मनाएंगे काला दिवस

केंद्र सरकार द्वारा बनाए तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर धरने प्रदर्शन पर बैठे किसान 26 मई को अपने विरोध प्रदर्शन के 6 महीने पूरे होने के मौके पर इसे काले दिवस के रूप में मनाएंगे। किसान प्रधान गोबिदर सिंह मंगवाल ने कहा कि केंद्र सरकार अपने अड़ियल रवैये से पीछे नहीं हट रही है।
किसान आंदोलन फेल करने के लिए सरकार किसानों को महामारी फैलाने का कारण बता रही है, लेकिन किसान किसी कीमत पर हार नहीं मानेंगे। किसानों ने कहा कि 26 मई को धरने के छह महीने पूरे हो जाएंगे। इस दिन को किसान काले दिन के तौर पर मनाएंगे। उन्होंने कहा कि जब तक काले कानून रद नहीं होते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

विरोध की जिद में गांव-गांव फैली महामारी

हरियाणा और पंजाब के साथ दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन कर रहे दोनों राज्यों के कृषि कानून विरोधी कोरोना के फैलाव का बड़ा कारण बन रहे हैं। इन धरनों पर ग्रामीण लोगों की लगातार आवाजाही रहती है। इससे ग्रामीण इलाकों में कोरोना का न केवल तेजी से फैलाव हुआ है, बल्कि कई लोग असमय काल कवलित हो चुके हैं।
पिछले एक माह के दौरान धरनास्थल के आस पास के गांवों में जहां 1097 लोगों की सामान्य मृत्यु हुई है, वहीं कोरोना की वजह से 174 लोग मौत के आगोश में चले गए हैं। इसका कारण है धरने पर बैठे किसान जो न तो कोरोना की टेस्टिंग कराने को तैयार हैं और न ही वैक्सीनेशन को राजी हैं। 

वैक्सीन लगाने से किया इंकार
धरने पर बैठे किसानों ने कोरोना की टेस्टिंग कराने से साफ इन्कार कर दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के लिए हम अपने मंच से कोई घोषणा नहीं करेंगे। स्वास्थ्य विभाग धरना स्थल के पास अपना वैक्सीनेशन कैंप लगा ले। यदि किसी व्यक्ति की इच्छा होगी तो वह टीका लगवा लेगा। अब तक मात्र 1800 लोगों ने टीके लगवाए हैं, जबकि एक भी व्यक्ति ने अपनी टेस्टिंग नहीं कराई। 

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