तालिबान ने दानिश सिद्दीकी की मौत पर माफी मांगने से किया इंकार कहा- हमें पता नहीं किसकी गोली से मारे गए

हाल ही में तालिबानी प्रवक्ता ने भारत के एक निजी समाचार पत्रिका से बातचीत के दौरान भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की मौत पर माफी मांगने से साफ इंकार कर दिया। उनके कहा कि, वे दुश्मन के टैंक में थे और पता नहीं किसकी गोली से मारे गए। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया की अभी तक भारत के किसी भी संस्थान या प्रतिनिधि के साथ तालिबान की कोई वार्ता नहीं हुई है। 

भारत द्वारा तालिबानी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद से बातचीत के कुछ अंश-

सवाल: क्‍या तालिबान ने भारत के विदेश मंत्रालय के साथ कोई बात की है?
जवाब: अभी तक भारत के किसी भी संस्थान या प्रतिनिधि के साथ तालिबान की कोई वार्ता नहीं हुई है।

सवाल: क्या तालिबान इस समय भारत के साथ कोई बातचीत कर रहा है?
जवाब: इस पर मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि हम दुनिया के हर उस देश के साथ बात करते हैं और करने को तैयार हैं, जो हमारे साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। शर्त बस यह है कि वह हमारे आंतरिक मामलों में दखल नहीं दे।

सवाल: इस समय अफगानिस्तान के कितने हिस्से पर तालिबान का कब्जा है?
जवाब: इस समय हमारी मिट्टी (अफगानिस्तान) का 85% हिस्सा तालिबान के कंट्रोल में है।

सवाल: भारत ने अफगानिस्तान में भारी निवेश किया है। क्या तालिबान इस निवेश की सुरक्षा की गारंटी देता है?
जवाब: हम अपनी सरजमीं पर हर उस जायज निवेश का समर्थन करते हैं, जिससे देश के आर्थिक विकास में मदद मिल सके। हम अफगान राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले हर निवेश की सुरक्षा करेंगे।

सवाल: भारत को लेकर तालिबान की रणनीति क्या है?
जवाब: हमारी रणनीति किसी भी देश में हस्तक्षेप न करने की है। हम किसी भी देश को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं और न अपने देश को किसी को नुकसान पहुंचाने देंगे। हम हिंदुस्तान समेत अपने सभी पड़ोसी देशों और दुनिया के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं।

सवाल: भारत की मौजूदा सरकार के बारे में तालिबान की क्या राय है?
जवाब: हम नहीं चाहते कि किसी दूसरे देश के अंदरूनी मामलों में दखल दें। भारत की सरकार को भारत के लोगों ने चुना है और पसंद किया है। इस बारे में हम कुछ नहीं कहेंगे।

सवाल: आरोप है कि भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की मौत के बाद तालिबान ने उनके शरीर को कुचला? क्या ये सच है कि तालिबान ने दानिश सिद्दीकी की मौत के लिए माफी मांगी है?
जवाब: दानिश सिद्दीकी की मौत जंग में हुई है और ये पता नहीं चला है कि वो किसकी गोली से मारे गए। उनकी लाश के साथ कोई बेहुरमती नहीं हुई है। किसी ने उनकी लाश को नहीं जलाया है। हम उनकी लाश की तस्वीरें आपको दिखा सकते हैं, उस पर जलाने की कोई निशानी नहीं है। उनके कत्ल के बाद उनका शव लड़ाई वाले हिस्से में पड़ा रह गया था। हमने उन्हें बाद में पहचाना। इसके बाद उनकी लाश को रेडक्रॉस के हवाले कर दिया गया था।
हम दानिश सिद्दीकी की मौत के लिए माफी नहीं मांगते क्योंकि ये पता नहीं है कि वो किसकी गोली से मारे गए हैं। उन्होंने हमसे युद्धक्षेत्र में आने की इजाजत भी नहीं ली थी। वो दुश्मन के टैंक में सवार थे। वे अपनी मौत के लिए खुद जिम्मेदार हैं।

सवाल: क्या तालिबान अफगानिस्तान सरकार के साथ शांतिवार्ता में भारत की मदद चाहेगा?
जवाब: शांति प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए हम सभी की मदद चाहते हैं। बशर्ते कि वे अफगानिस्तान में शांति और सुरक्षा स्थापित करने के तरफदार हों। भारत को काबुल एडमिनिस्ट्रेशन (अफगानिस्तान सरकार) को हथियार और बाकी सैन्य मदद नहीं देनी चाहिए, क्योंकि वो हमारे खिलाफ इस्तेमाल होंगे। उदाहरण के लिए भारत ने वॉर प्लेन अफगानिस्तान को दिए हैं। ऐसे कामों से हमारे संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

सवाल: तालिबान कश्मीर के बारे में क्या सोचता है?
जवाब: कश्मीर कश्मीरियों का मुद्दा है। किसी को कश्मीरियों के अधिकार नहीं रौंदने चाहिए। हम कश्मीर के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। जो कुछ कश्मीरी चाहते हैं, हम भी उसी के तरफदार हैं। कश्मीरियों की आम सहमति से कश्मीर के मुद्दे का हल किया जाना चाहिए।

सवाल: बतौर तालिबान प्रवक्ता आप भारत से कुछ कहना चाहेंगे?
जवाब: हम कहना चाहेंगे कि भारत के लोग अपनी सरकार पर दबाव बनाएं कि वह अफगानिस्तान में नकारात्मक हस्तक्षेप न करे। भारत अफगान सरकार को ऐसे सैन्य उपकरण न दे, जिनका इस्तेमाल युद्ध में बच्चों, औरतों और बूढ़ों की जान लेने के लिए किया जाए। भारत को हथियार भेजने के बजाय अफगानिस्तान के लिए आर्थिक और मानवीय मदद भेजनी चाहिए जो आम लोगों के काम आ सके।

सवाल: कहा जाता है कि तालिबान पर पाकिस्तान का नियंत्रण है। क्या पाकिस्तान भारत-अफगानिस्तान संबंधों को प्रभावित कर सकता है?
जवाब: यह गलत बातें हैं। हम तालिबान पर पाकिस्तान के नियंत्रण को बिल्कुल नहीं मानते हैं। पाकिस्तान लाखों अफगानिस्तानी शरणार्थियों का मेजबान देश भी है। पाकिस्तान के साथ हमारी लंबी सीमा लगी है। इन्हीं वजहों से हम पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। हिंदुस्तान भी हमारे लिए अलग अहमियत रखता है। हम भारत के साथ सामान्य और एक दूसरे के लिए सम्मानजनक संबंध चाहते हैं। ऐसे संबंध जो उसूलों पर आधारित हों।

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