सैयद अली शाह गिलानी का निधन, शोक में डूबा पाकिस्तान, झुकवाया आधा झंडा, कहा- भारत ने किया था टॉर्चर

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी का बुधवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने 91 साल की उम्र में श्रीनगर में अपने आवास पर रात करीब 10:30 पर आखिरी सांस ली। उन्हें सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ थी। बता दें कि गिलानी लंबे समय से बीमार थे और 2008 से अपने हैदरपोरा स्थित आवास पर नजरबंद थे। लेकिन आदत से मजबूर पाकिस्तानी पीएम इमरान खान इस मौके पर भी अपनी चालबाजी से बाज नहीं आए। 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गिलानी के निधन पर ट्वीट करते हुए लिखा, कश्‍मीरी नेता सैयद अली शाह गिलानी के निधन की खबर सुनकर बहुत दुखी हूं। गिलानी जीवनभर अपने लोगों और उनके आत्‍मनिर्णय के अधिकार के लिए लड़ते रहे। इमरान ने कहा कि भारत ने उन्‍हें कैद करके रखा और टॉर्चर किया। इमरान ने आगे अपने ट्वीट में कहा, “हम पाकिस्‍तान में उनके संघर्ष को सलाम करते हैं और उनके शब्‍दों को याद करते हैं- हम पाकिस्‍तानी हैं और पाकिस्‍तान हमारा है।

पाकिस्‍तान का झंडा आधा झुका रहेगा और हम एक दिन का आधिकारिक शोक मनाएंगे।” वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी गिलानी को याद करते हुए बयान जारी किया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा है, ”सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीर की तीन पीढ़ियों को प्रेरित किया। वे कश्मीर की सच्ची आवाज़ थे और उन्होंने कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए ख़ुद को समर्पित कर दिया। उन्होंने अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया।”

पाकिस्तान के सीनियर और चर्चित पत्रकार हामिद मीर ने गिलानी का वो वीडियो क्लिप पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने ”हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है” का नारा दिया था। इस वीडियो के साथ हामिद मीर ने लिखा है, ”यह साहसी व्यक्ति हमेशा ये नारा लगाता रहा- हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है। पाकिस्तानियों के दिलों में गिलानी हमेशा ज़िंदा रहेंगे।” वीडियो में गिलानी कहते दिख रहे हैं, ”इस्लाम के ताल्लुक से, इस्लाम की मोहब्बत से, हम पाकिस्तानी हैं और पाकिस्तान हमारा है।”

इन सब के बीच भारत में पाकिस्तान के राजदूत रहे अब्दुल बासित ने भी गिलानी के साथ अपनी एक तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा है, ”वे हमारे हीरो थे। आख़िरी सांस तक आज़ादी की लड़ाई लड़ते रहे। कश्मीर पर कभी समझौता नहीं किया। अल्लाह उनकी आत्मा को शांति दे और हमें इतनी ताक़त दे कि कश्मीर को आज़ाद करने के उनके मिशन को पूरा कर सकें।”

गौरतलब हो की गिलानी कश्मीर में सक्रिय अलगाववादी नेता थे। गिलानी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते थे और उसे अलग करने की मांग करते थे। भारत विरोधी बयानों के लिए मशहूर रहे गिलानी को पड़ोसी देश पाकिस्तान ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से भी नवाजा था। कश्मीर में गिलानी के प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी एक आवाज पर कश्मीर बंद हो जाता था। फिलहाल प्रशासन ने एहतियातन घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करते हुए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। 

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