मध्य हिमालयी क्षेत्र में रासायनिक संरचना और कणों के स्रोत विभाजन का अध्ययन

नई दिल्ली, 08 अक्टूबर (विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी मंत्रालय): एक अध्ययन से यह पता चला है कि खनिज धूल, जैव पदार्थों (बायोमास) का जलना, द्वितीयक सल्फेट और द्वितीयक नाइट्रेट उत्तर पश्चिम भारत और पाकिस्तान जैसे प्रदूषित शहर, थार रेगिस्तान और अरब सागर क्षेत्र, एवं और लंबी दूरी तक वायु संचरण में सक्षम समुद्री मिश्रित एरोसोल मध्य हिमालय में एरोसोल के मुख्य स्रोत हैं। 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, सरकार के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान, आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान, नैनीताल के शोधकर्ताओं ने भारतीय और विदेशी सहयोगियों के साथ मिलकार मध्य हिमालयी क्षेत्र में रासायनिक संरचना और कुल निलंबित कण के स्रोत विभाजन का अध्ययन किया। इस दूरस्थ पृष्ठभूमि स्थान में एरोसोल के लिए मुख्य स्रोत क्षेत्र उत्तर पश्चिम भारत और पाकिस्तान के मैदान, दिल्ली जैसे प्रदूषित शहर, थार रेगिस्तान और अरब सागर क्षेत्र थे।

श्री राहुल श्योराण (पीएचडी छात्र एरीज़, नैनीताल, भारत) और डॉ. उमेश चंद्र दुमका (वैज्ञानिक, एआरआईईएस, नैनीताल, भारत) के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के साथ-साथ सहयोगियों के योगदान से पता चला कि मुख्य एरोसोल स्रोत (कारक) नैनीताल में खनिज धूल (मिनरल डस्ट) 34% , जैव पदार्थ (बायोमास) का जलाना (27%), द्वितीयक (सेकेंडरी सल्फेट) (20%), द्वितीयक (सेकेंडरी नाइट्रेट) (9%), और लंबी दूरी तक जाने में सक्षम और समुद्री मिश्रित एरोसोल (10%) थे, जो अलग-अलग मौसमी पैटर्न प्रदर्शित करते थे। 

वसंत और गर्मियों में खनिज धूल और सर्दियों में बायोमास जलने और द्वितीयक सल्फेट की प्रबलता थी। परिवहन किए गए समुद्री मिश्रित एरोसोल स्रोत मुख्य रूप से गर्मी के मौसम के दौरान दक्षिणपश्चिमी मानसूनि पवनों के द्रव्यमान से जुड़े थे। ‘एटमॉस्फियर’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि भारतीय गांगेय प्रदेश के मैदानों और हिमालय पर जैव अपशिष्ट (बायोमास) जलने की तीव्रता एवं घरेलू गर्मी और वायु की उथली मिश्रित परत के कारण सर्दियों में कार्बनयुक्त (कार्बोनेसियस) एरोसोल जैविक कार्बन (ओसी) और तात्विक (एलिमेंटल) कार्बन (ईसी) सबसे अधिक थे। 

शोधकर्ताओं ने जैव अपशिष्ट की जलाने (बायोमास-बर्निंग) से बने एरोसोल के एक महत्वपूर्ण प्रभाव का भी सुझाव दिया, जबकि पानी में अपेक्षाकृत उच्च रूप से घुलनशील जैविक कार्बन और नैनीताल पर बायोमास जलने, माध्यमिक, या पुराने कार्बनिक एरोसोल का भी महत्वपूर्ण योगदान था ।

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