सोनू सूद ने रोते हुए कहा अच्छा है मेरे माता पिता ज़िन्दा नहीं है वरना मै भी ऐसे रोड पे बेड ढूंढता होता

सोनू सूद कोरोना के इतने बुरे दौर में लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं और कोशिश कर रहे है कि वो ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद कर सके। सोनू सूद लगातार लोगों के लिए ऑक्सीजन, हॉस्पिटल बेड्स, वेंटिलेटर और दवाओं का इंतजाम कर रहे हैं। हालांकि उनकी कोशिशें भी लोगों की मदद के लिए पूरी नहीं पड़ रही हैं।अब वो भी असहाय महसूस कर रहे है बेड, ऑक्सीजन की कमी से देश के लोगों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। 

पत्रकार बरखा दत्त को इंटरव्यू देते हुए सोनू सूद ने बताया कि किस तरह देश की राजधानी सहित अलग-अलग हिस्सों में लोग बिना इलाज के तड़प रहे हैं और अपनों को खो देने पर मजबूर हैं। 

सोनू ने कहा, ‘मेरे पैरंट्स अब जिंदा नहीं हैं और कभी-कभी मैं सोचता हूं कि अच्छा ही है कि वे चले गए अगर आज उन्हें कुछ हो जाता तो मैं उनके लिए भी इधर-उधर भाग रहा होता। आप खुद को एक असफल व्यक्ति मानते हैं जब आप किसी अपने प्रिय व्यक्ति के लिए ऑक्सीजन तक का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। आपको लगता है कि मैंने जिंदगी में ऐसा क्या हासिल कर लिया। मेरे पास बहुत ही सफल और स्थापित लोगों के कॉल्स आ रहे हैं जिनके पास दिल्ली में बड़े घर और वे कहते हैं- प्लीज मुझे एक बेड दिलवा दीजिए।’

इंटरव्यू के दौरान सोनू सूद बेहद इमोशनल हो गए और बोले, ‘सोचिए, वे कितने असहाय हैं। सोचिए, एक आम आदमी या गरीब आदमी का क्या होगा जिसके पास संसाधन नहीं हैं। उनका ख्याल कौन रखेगा? इससे बुरा कुछ भी नहीं हो सकता। कम से कम ऑक्सीजन मिलना, हॉस्पिटल मिलना तो मेरा अधिकार है। अगर हम कहें कि एक लाख लोग मर गए तो सोचिए अगर हमारे पास 1 लाख बेड्स होते तो उन लोगों को बचाया जा सकता था। लोग इसलिए नहीं मर रहे क्योंकि उन्हें मरना था बल्कि वे सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मर रहे हैं। इन लोगों के परिवार आगे कैसे जिएंगे?

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