यूरोप और अमेरिका में मंकीपॉक्स से निपटने के लिए चेचक के टीके का किया जा रहा है इस्तेमाल, इस बिमारी के लिए फिलाहल कोई वैक्सीन नहीं

कोरोना महामारी का प्रकोप अभी तक पूरी दुनिया से समाप्त भी नहीं हुआ है कि मंकीपॉक्स नामक एक बीमारी ने दुनिया में
दस्तक दे दी है. मंकीपॉक्स यू तो विदेशों में सबसे पहले पाया गया लेकिन अब इसने भारत में भी दस्तक दे दी है. भारत की राजधानी नई दिल्ली में मंकीपॉक्स का चौथा मामला सामने आया है। दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में पाए गए मंकीपाक्स के मरीज के संपर्क में आए 13 लोगों को 21 दिन के लिए जिला प्रशासन ने आइसोलट कर दिया है. बताया जा रहा है कि मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है, और वह ठीक हो रहा है. भारत में मंकीपॉक्स का पहला मामला केरल में पाया गया था.  मंकीपॉक्स नामक इस नई बिमारी को लेकर भारत सरकार की सतर्क हो गई है वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा भी मंकीपॉक्स को लेकर देशों से सतर्कता बरतने को कहा गया है.

वहीं अगर बात मंकीपॉक्स से निपटने के लिए दवाई की करें तो फिलहाल मंकीपॉक्स से निपटने के लिए कोई विशेष टीका या फिर दवाई नहीं है. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि चेचक का टीका मंकीपॉक्स को रोकने में 85 फिसदी तक कारगर देखा गया है.  ऐसे में फिलहाल पूरी दुनिया में जहां-जहां मंकीपॉक्स के मामले सामने आ रहे हैं वहां अक्सर ही चेचक का टीका इस्तेमाल किया जा रहा है. अब तक अमेरिका में मंकीपॉक्स की 2800 मामले सामने आ चुके हैं. यूरोप के कई देशों में भी मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं. जैसा कि वर्तमान में मंकीपॉक्स से निपटने के लिए कोई विशेष टीका या फिर दवाई नहीं है तो ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेचक के टीके को मंकीपॉक्स से निपटने में काफी कारगर पाया है.

यही कारण है कि यूरोपीय और दुनिया के अन्य देशों में मंकीपॉक्स से निपटने के लिए चेचक का टीका इस्तेमाल किया जा रहा है. बात अगर भारत कि करें तो अभी भारत में मंकीपॉक्स कि अब तक 4 मामले सामने आ चुके हैं. भारत के केरल में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया था तो वहीं अब राजधानी दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में एक व्यक्ति को मंकीपॉक्स से संक्रमित पाया गया है।

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