जवाहर नवोदय विद्यालय के सोलह छात्रों ने आठ क्षुद्रग्रहों को पता लगाया

भारत सरकार/इंडिया साइंस वायर): जवाहर नवोदय विद्यालयों के सोलह छात्रों द्वारा खगोलशाला क्षुद्रग्रह खोज अभियान 2021 के तहत खोजे गए आठ क्षुद्रग्रहों को इंटरनेशनल ऐस्ट्रनॉमिकल सर्च कोलाबरेशन द्वारा “प्रोविजनल स्टेटस” प्रदान किया गया है।
खगोलशाला क्षुद्रग्रह खोज अभियान या केएएससी, जवाहर नवोदय विद्यालयों के छात्रों को क्षुद्रग्रहों का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित करता है। यह अभियान प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, भारत सरकार और स्पेस फाउंडेशन की एक पहल है।
हार्डिन-सीमन्स विश्वविद्यालय में स्थित इंटरनेशनल ऐस्ट्रनॉमिकल सर्च कोलाबरेशन (आईएएससी) ने अनंतिम खोजों की पुष्टि करते हुए अपनी स्वीकृति भेजी है। हालांकि, क्षुद्रग्रहों का दस्तावेजीकरण होने में वर्षों लगेंगे और खोजकर्ता उन्हें नाम दे सकते हैं लेकिन आठ क्षुद्रग्रहों को स्थिति का सफलतापूर्वक पता लगाना और उन्हें प्रोविजनल स्टेटस मिलना युवा छात्रों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पूरी प्रक्रिया छात्रों के लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिकों, खगोलविदों और अंतरिक्ष यात्रियों के साथ बातचीत करने के कई अवसर प्रदान करेगा।
यह ज्ञान रियल टाइम रिसर्च के लिए होना बहुत जरूरी है। यह अभियान जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (पासाडेना, सीए) में नासा नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट (एनईओ) कार्यक्रम में योगदान देता है।
छात्रों को हवाई में स्थित ‘पैनस्टारआरएस’ (पैनोरमिक सर्वे टेलीस्कोप और रैपिड रिस्पांस सिस्टम टेलीस्कोप) से रीयल-टाइम डेटा प्राप्त होता है। वे इन छवियों को विश्लेषण करने और क्षुद्रग्रहों का पता लगाने के लिए उन्नत डेटा एनालिटिक्स में प्रशिक्षित होते हैं। यह ज्ञान रियल टाइम रिसर्च के लिए होना बहुत जरूरी है। यह अभियान जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (पासाडेना, सीए) में नासा नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट (एनईओ) कार्यक्रम में योगदान देता है।
क्षुद्रग्रहों के विश्लेषण और पहचान के लिए छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले खगोलीय डेटा सेट वितरित किए जाते हैं। छात्र सॉफ्टवेयर का उपयोग करके डेटा का विश्लेषण करते हैं, जो उन्हें संभावित खोजों की ओर ले जाता है। ये अवलोकन नासा और जेट प्रोपल्शन लैब (जेपीएल) द्वारा संकलित किए जा रहे नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट (एनईओ) डेटा में फीड होते हैं।
स्पेस इंडिया ने अब तक 20 जवाहर नवोदय विद्यालयों में खगोलशाला खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष शिक्षा प्रयोगशाला (एएसईएल) की स्थापना की है। स्पेस इंडिया देश में युवा पीढ़ी को खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान में दिलचस्पी बढ़ाने के लिए एक विजन के साथ काम कर रहा है जिनमें इन क्षेत्रों में अनुप्रयोग, अन्वेषण, नवाचार और अनुसंधान शामिल हैं। स्पेस इंडिया की टीम ब्रह्मांड के बारे में जानकारी, अवलोकन और विश्लेषण के माध्यम से छात्रों को जोड़ने का काम करती है।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending