क्या महिलाओं को नहीं करनी चाहिए बजरंग बली की पूजा, जानिए क्या कहता है शास्त्र

हमारे देश में पूजा के विधान क्षेत्र विशेष की परंपराओं के अनुसार होते हैं, लेकिन एक मिथक सभी जगह है, वो ये कि महिलाएं हनुमान जी को स्पर्श नहीं कर सकतीं और उनकी पूजा नहीं कर सकतीं। इसके पीछे तमाम विद्वान तर्क देते हैं कि हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं, इसलिए महिलाओं को हनुमान जी को स्पर्श नही करना चाहिए। वहीं कुछ विद्वान कहते हैं कि हनुमान जी ‍स्त्रियों को माता स्‍वरूप मानते हैं, ऐसे में वे अपनी माता को चरणों के सामने झुकते हुए नहीं देख पाते। लेकिन क्या यह सभी तर्क सार्थक है??? क्या सच में महिलाओं को नहीं करनी चाहिए बजरंग बली की पूजा अर्चना?? क्या शास्त्र महिलाओं को नहीं देता हनुमान की पूजा करने की इजाजत ??? 
हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह महीना ज्येष्ठ का चल रहा है जिसे अमूमन बड़ा मंगल भी कहा जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार आज चौथा और आखिरी बड़ा मंगल है। हर मंगलवार की तरह बड़ा मंगल भी हनुमान बाबा को समर्पित होता है। जीवन के ​बड़े बड़े संकटों को टालने के लिए संकटमोचन के भक्त आज के ​दिन उनकी विशेष पूजा करते हैं। लोग मंदिरों में या घरों में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या रामायण आदि का पाठ कर​ते हैं। जगह जगह विशाल भंडारे आयोजित किए जाते हैं।कहा जाता है कि बड़े मंगल के दिन कोई भी शख्स भूखा नहीं सोता। आज बड़े मंगल के साथ भौम प्रदोष भी है। प्रदोष व्रत शिव को समर्पित है और हनुमान जी भगवान शिव के ही अवतार हैं। ऐसे में आज के दिन की महत्ता कहीं अधिक बढ़ गई हैं। हनुमान जी को लेकर कहा जाता है कि उनकी पूजा स्त्रियों को नहीं करनी चाहिए। इसलिए आज हम जानेंगे की आखिर क्या कहते है ज्योतिषी और इस तर्क के पीछे क्या कहता है हमारा शास्त्र।

आइए जानते है क्या कहते है ज्योतिष विद्वान और शास्त्र….

हिंदु ज्योतिष विद्वान प्रज्ञा वशिष्ठ के अनुसार हनुमान जी की पूजा में विशेष तौर पर स्वच्छता का ध्यान रखने की जरूरत है। लेकिन ये नियम भी पुरुष और स्त्री दोनों पर ही लागू होता है। महिलाएं रजस्वला होने पर हनुमान जी से संबंधित कोई भी कार्य न करें। लेकिन सामान्य दिनों में पूरी स्वच्छता को बरतते हुए महिला यदि उनकी पूजा पिता स्वरूप या भाई स्वरूप में करती है, उनको चोला या वस्त्र प्रेमपूर्वक धारण करताती है, तो इससे भला भगवान का ब्रह्मचर्य कैसे टूट सकता है। भगवान सिर्फ भावना को स्वीकार करते हैं और एक बहन और एक मां के रूप में स्त्री की भावना कभी दूषित नहीं मानी जाती। ये सब मिथ्या और तथ्यहीन बातें हैं, जिनका कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है। सभी को पूरी वैज्ञानिकता और व्यवहारिकता के साथ अपने धर्म, संस्कृति और पूजा पद्धति को समझना चाहिए और भ्रांतियों से दूर रहना चाहिए।

शास्त्रों में नहीं है कोई जिक्र

रामचरित मानस में कहा गया है की,हनुमान जी की पूजा से मानव मात्र को अमुक फल प्राप्त होता है। इसके अलावा समस्याओं के हिसाब से पूजा के अलग अलग विधान बताए गए हैं, लेकिन कहीं भी स्त्री या पुरुष का जिक्र नहीं किया गया है। पूरे मानव जाति के कल्याण की बात लिखी है। इसके अलावा रामचरित मानस में भी एक जगह उल्लेख मिलता है कि “तब हनुमंत नगर महू आए, सुनहि निशाचर निशाचारी धाय” जब रावण की मृत्यु की सूचना लेकर हनुमान जी अशोक वाटिका में गए तो वहां उपस्थित सभी निशाचर और निशाचरी उनकी पूजा करने लगे। यहां भी हनुमान जी की पूजा निशाचर और निशाचरी दोनों के द्वारा करने का जिक्र है, तो महिलाओं के लिए उनकी पूजा कैसे वर्जित हो सकती है। अर्थात् महिलाओं को लेकर इस तरह का कोई भी जिक्र शास्त्रों में देखने को नहीं मिलता है जिससे यह साबित हो सके की महिलाओं को राम भक्त हनुमान की पूजा नही करनी चाहिए।

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