वैज्ञानिकों ने मोतियाबिंद को रोकने के लिए तैयार किया एक नया छर्रेनुमा इम्प्लांट, अब बिना सर्जरी के भी संभव होगा इलाज

आंखों में बढ़ते मोतियाबिंद के मामलो को देखते हुए वैज्ञानिकों ने इसे रोकने के लिए एक नया छर्रेनुमा इम्प्लांट तैयार किया है। नए इम्प्लांट को अमेरिकी फार्मा कम्पनी नेक्युटी फार्मास्युटिकल्स ने तैयार किया। इम्प्लांट का नाम NPI-002 है। कम्पनी का दावा है कि इस इम्प्लांट की मदद से काफी हद तक मरीजों की सर्जरी रोकी जा सकेगी।

वैज्ञानिको का कहना है, एंटीऑक्सीडेंट्स से भरे इस छर्रेनुमा इम्प्लांट को मरीज की आंख में इंजेक्ट किया जाता है। यह इम्प्लांट धीरे-धीरे एंटीऑक्सीडेंट्स (एन-एसिटिसिस्टीन एमाइड) को रिलीज करता है। यह केमिकल मोतियाबिंद के असर को कम करने काम करता है। अमेरिका की वाशिंगटन यूनिवर्सिटी ने जानवरों पर इस इम्प्लांट का प्रयोग किया है।

रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया कि यह गंभीर से गंभीर मोतियाबिंद के असर को घटाता है। इसकी मदद से आंखों में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा बढ़ती है और पहले के मुकाबले कैल्शियम की मात्रा 2.5 गुना तक कम हो जाती है। 

यह इम्प्लांट आंखों में कैल्शियम का स्तर बढ़ने से रोकता है। फिलहाल यह किस हद तक असरदार है, इसकी जांच के लिए क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। जल्द ही ह्यूमन ट्रायल शुरू होगा। ट्रायल में 65 या इससे अधिक उम्र वाले 30 मरीजों को शामिल किया जाएगा।

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