वैज्ञानिकों ने विकसित किया ‘कोरोना अलार्म’: अब 15 मिनट में पता लगेगा कमरे में मौजूद कोरोना संक्रमण का….

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा डिवाइस विकसित करने में सफलता हासिल की है जिसकी मदद से हम केवल 15 मिनट में कमरे मे मौजूद कोरोना संक्रमण का पता लग सकता है। हालांकि अगर कमरा बड़ा है तो संक्रमण का पता लगाने में 30 मिनट का समय लग सकता है। मशीन बनाने वाले वैज्ञानिकों ने कहा कि अभी इस मशीन को लेकर और अधिक रिसर्च की जरूरत है। हालांकि अभी तक किए गए 54 सेंपल के विश्लेषण भी पर्याप्त हैं। कोरोना वायरस पहचानने वाली इस मशीन को स्कूलों से लेकर हॉस्पिटल, विमानों के केबिनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। कंप्यूटर और मोबाइल पर तुरन्त इसका अलर्ट भेज सकते हैं। बता दें कि इस डिवाइस की कीमत करीब 5.15 लाख रुपए है। 

यह मशीन संक्रमित की पहचान के बाद अधिकृत व्यक्ति को संदेश भेजती है
यह डिवाइस त्वचा और सांसों द्वारा उत्पादित रसायनों का पता लगाकर संक्रमितों की पहचान करती है। वायरस के चलते वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOC) में बदलाव होने लगता है। इससे शरीर में गंध पैदा होती है, डिवाइस में लगे सेंसर इसे पहचान लेते हैं। डिवाइस अधिकृत व्यक्ति को यह जानकारी भेज देता है।

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन में रोग नियंत्रण विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जेम्स लोगान ने कहा कि इस डिवाइस की टेस्टिंग 2021 के अंत तक पूरी कर ली जाएगी। प्रोफेसर ने जेम्स लोगान आगे कहा, कोरोना में यह बहुत कारगर साबित होगी। ये सटीकता के साथ तेजी से परिणाम देगी। अगर इन मशीनों को पब्लिक प्लेस में इस्तेमाल किया जाने लगा तो धीरे-धीरे कोरोना पर पूरी तरह नियंत्रण पा सकते हैं।

कोरोना संक्रमितों की जानकारी देने वाली यह डिवाइस आने वाले समय में विमानों के केबिन, क्लासरूम, केयर सेंटरों, घरों और ऑफिस में स्क्रीनिंग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इसका नाम कोविड अलार्म रखा गया है। यह डिवाइस स्मोक अलार्म से थोड़ा बड़ा है।यह डिटेक्टर कोविड वायरस से संक्रमित लोगों को ढूंढ सकता है, चाहे संक्रमित व्यक्ति में कोरोना के लक्षण न दिखें, लेकिन मशीन अपना काम प्रभावी तरीके से करती है। एक बार पता चलने के बाद कमरे में मौजूद लोगों का व्यक्तिगत स्तर पर टेस्ट करना होता है।

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन (LSHTM) और डरहम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की रिसर्च के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों पर संक्रमण का पता लगाने और कोरोना के अलावा भविष्य की महामारियों की पहचान के लिए भी यह कारगर होगा, जिनका कुछ ही हफ्तों में फैलने का जोखिम रहता है।वैज्ञानिकों ने टेस्टिंग के दौरान दिखाया है कि डिवाइस में नतीजों की सटीकता का स्तर 98-100 फीसदी तक है। यह कोरोना के RT-PCR और एंटीजन टेस्ट की तुलना में कहीं ज्यादा सटीकता से कोरोना संक्रमितों के बारे में जानकारी दे रहा है।

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