वैज्ञानिकों ने सिल्वर नैनोवायर के निर्माण के लिए विकसित की सरल प्रक्रिया, दसवें हिस्से से भी कम होगा इसकी लागत का बाजार मूल्य

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी मंत्रालय): भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने नैनो-सामग्री (सिल्वर नैनोवायर) के बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए एक प्रक्रिया विकसित की है जो इसके लागत को बाजार मूल्य के दसवें हिस्से से भी कम कर सकती है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) – राष्‍ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (नेशनल केमिकल लेबोरेटरी), पुणे के डॉ. अमोल ए. कुलकर्णी द्वारा विकसित इस प्रक्रिया से बीस डॉलर प्रतिग्राम की दर से पांच सौ ग्राम सिल्वर नैनो वायर का उत्‍पादन किया जा सकता है।

जबकि इस समय इसका बाजार मूल्‍य इस समय 250 डॉलर प्रति ग्राम से 400 डॉलर प्रति ग्राम तक है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के समर्थन से बड़े पैमाने पर कार्यात्मक नैनो-सामग्री (सिल्वर नैनोवायर) के निरंतर प्रवाह निर्माण की एक किफायती प्रक्रिया है। निर्मित उत्पाद में उत्कृष्ट चालकता वाले चांदी के नैनोवायर होते हैं जिनका उपयोग प्रदर्शन प्रौद्योगिकियों और लचीले इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए स्याही और कोटिंग्स बनाने में किया जा सकता है। इस अनूठी प्रक्रिया के लिए कुल 5 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट भी दायर किए गए हैं। 

मौजूदा बैच निर्माण प्रोटोकॉल की तुलना में यह प्रक्रिया एक सरल, लागत प्रभावी और मापनयोग्‍य संश्लेषण मार्ग है जो निलंबन में बड़ी मात्रा में ऐसे नैनोकणों को भी उत्पन्न करता है, जिनको नैनोवायर से अलग करना आसान नहीं है। विकसित प्रक्रिया का परीक्षण सीएसआईआर-एनसीएल की लक्षण वर्णन सुविधा में किया गया है और यह प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर के आठवें चरण में है। यह तकनीक भारतीय उद्योगों को इलेक्ट्रॉनिक रसायनों के विशिष्ट क्षेत्र में प्रवेश करा सकती है और अंततः नई नौकरियों के अवसर भी पैदा कर सकती है।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending