वैज्ञानिकों को मिले दुर्लभ कॉम्पैक्ट स्टार से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग

नई दिल्ली, 24 दिसंबर (इंडिया साइंस वायर): विशालकाय तारे (Supergiant Stars), जो अपने भीतर 10 से 25 सूर्यों को समाहित कर सकते हैं, अपने आप नष्ट होते हैं, तो वे न्यूट्रॉन तारे बनाते हैं, इन न्यूट्रॉन तारों के बीच सबसे तीव्र चुंबकीय क्षेत्र के साथ एक छोटा समूह होता है, जिसे मैग्नेटर के रूप में जाना जाता है। मैग्नेटेर्स में छिपे रहस्यों के बारे में दुनिया भर के वैज्ञानिक लंबे समय से हैरान हैं।

भारतीय शोधकर्ताओं समेत अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम के एक नये अध्ययन में ऐसे महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो करीब 13 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित मैग्नेटर नामक दुर्लभ कॉम्पैक्ट स्टार से उभरने वाली एक सेकेंड से भी कम अवधि की प्रचंड चमक के पीछे छिपे रहस्यों को खुलासा करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कॉम्पैक्ट स्टार या कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट शब्द सामूहिक रूप से सफेद बौनों (White dwarfs), न्यूट्रॉन तारों और ब्लैक होल को संदर्भित करता है।

जबकि, मैग्नेटर; जिनमें से अब तक केवल तीस ही ज्ञात हैं, ब्रह्मांड में उच्च चुंबकीय न्यूट्रॉन तारों के रूप में जाने जाते हैं। तीव्र चुंबकीय क्षेत्र वाले कॉम्पैक्ट तारों के प्रचंड विस्फोट और इनके अप्रत्याशित स्वभाव और एक सेकंड के बमुश्किल दसवें हिस्से की अवधि के कारण उनके बारे में जानकारी बहुत कम है। यह अध्ययन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से सम्बद्ध आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस) के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडेय और अन्य शोधकर्ताओं की टीम द्वारा ऐंडालुसियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईएए-सीएसआईसी),

स्पेन के अल्बर्टो जे. कास्त्रो-टिराडो के नेतृत्व में किया गया है। यह अध्ययन शोध पत्रिका नेचर में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों ने कॉम्पैक्ट स्टार से सम्बन्धित एक विस्फोट का विस्तार से अध्ययन किया है, जिससे उन्हें उच्चतम ऊर्जा के क्षणों के दौरान विभिन्न दोलनों, या कंपन मापने में मदद मिली है। इसे विशाल मैग्नेटर फ्लेयर्स को समझने में एक महत्वपूर्ण घटक बताया जा रहा है। यह पहला परगैलेक्सीय (Extragalactic) मैग्नेटर है, जिसका विस्तार से अध्ययन किया है।

परगैलेक्सीय खगोलिकी (Extragalactic astronomy) खगोलशास्त्र की वह शाखा है, जिसमें आकाश गंगा नामक हमारी गैलेक्सी से बाहर स्थित खगोलीय वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है प्रमुख शोधकर्ता कास्त्रो-टिराडो ने कहा, “निष्क्रिय अवस्था में भी, मैग्नेटर्स हमारे सूर्य की तुलना में कई हजार गुना अधिक चमकदार हो सकते हैं। 15 अप्रैल, 2020 को घटित और एक सेकंड के लगभग दसवें हिस्से तक ही रहने वाले GRB2001415 फ्लैश के मामले में हमने अध्ययन किया है,

जो 0.1 सेकंड में उतनी ही ऊर्जा छोड़ता है, जितना हमारा सूर्य एक लाख (100,000) वर्षों में उत्पन्न करता है।” कास्त्रो-टिराडो ने बताया है कि अध्ययन में, कई कंपनों का पता चला है, जिसमें पहला कंपन दस माइक्रो सेकेंड अवधि का दिखाई देता है, जो अन्य चरम खगोलीय क्षणिक परिवर्तनों की तुलना में काफी तेज है। वैज्ञानिक लंबे समय से इस तरह के सेकेंड से भी कम समयावधि वाले तीव्र विस्फोटों से चकित हैं।

कास्त्रो-टिराडो का कहना है कि “मैग्नेटर्स से विशाल फ्लेयर्स का पता लगाना अत्यंत दुर्लभ है। इस विस्फोट ने यह समझने में एक महत्वपूर्ण घटक प्रदान किया है, जिससे समझा जा सकता है कि न्यूट्रॉन स्टार और उसके आसपास चुंबकीय प्रभाव कैसे उत्पन्न होते हैं।” इस अध्ययन में शामिल एआरआईईएस के शोधकर्ता शशि भूषण पांडेय का कहना है

कि “आसपास की आकाशगंगाओं में मैग्नेटर्स की निरंतर निगरानी इस तरह की घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने में मददगार हो सकती है, जिससे खगोल-विज्ञान में सबसे गूढ़ घटनाओं में से एक तीव्र रेडियो विस्फोट के बारे में और जानने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।”

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