वैज्ञानिकों ने इंसानों के फेफड़े जैसी गति करने वाला 3डी रोबोटिक मोशन फैंटम विकसित किया

नई दिल्ली, 21 जुलाई (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय): आइआइटी कानपुर और संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी एसजीपीजीआई, लखनऊ के वैज्ञानिक और चिकित्सक ने मिलकर एक ऐसा सस्ता उपकरण विकसित किया है जिसकी सहायता से फेफड़े के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सांस लेने में आसानी होगी।

इसे 3डी रोबोटिक मोशन फैंटम नाम दिया गया है। इस यंत्र के जरिए कैंसर के मरीजों में केंद्रित रेडिएशन देने में सहायता मिलेगी। इसके जरिए कृत्रिम रूप से सांस लेने के दौरान मानव के फेफड़ों की गति को फिर से उत्पन्न किया जा सकता है। हाल में तकनीक विकास के चलते गेटिंग और ट्रैकिंग जैसी अत्याधुनिक गति प्रबंधन तकनीक सामने आई हैं।

भले ही श्वसन संबंधी गतिशील लक्ष्यों के रेडिएशन उपचार में निरंतर विकास हुआ है, लेकिन इसके समानांतर गुणवत्ता आश्वासन (क्यूए) टूल विकसित नहीं हुए हैं। श्वसन संबंधी गति प्रबंधन तकनीकों की उपचार प्रक्रिया में एक विशेष प्रकार की सटीकता के उद्देश्य से मरीज के एक अंग में अवशोषित खुराक की मात्रा के निर्धारण के लिए अतिरिक्त श्वसन संबंधी गतिशील फैंटम की जरूरत होती है।

हाल मे ही अभी भारतीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक नवीन और सस्ती 3डी रोबोटिक मोशन फैंटम का विकास किया है, जो श्वास लेने के दौरान एक मानव के फेफड़े जैसी गति पैदा कर सकते हैं। फैंटम एक ऐसे प्लेटफॉर्म का हिस्सा है, जो न सिर्फ एक मरीज के श्वास लेने के दौरान मानव फेफड़े जैसी गति पैदा करता है, बल्कि यह जांच करने के लिए भी उसका इस्तेमाल किया जा सकता है कि क्या रेडिएशन का एक गतिशील लक्ष्य पर सही प्रकार से केंद्रित उपयोग हो रहा है।

फैंटम को इंसान की जगह सीटी स्कैनर के अंदर बेड पर रखा जाता है और यह उपचार के दौरान रेडिएशन के समय मानव फेफड़े की तरह गति करता है। इर्रेडिएशन के दौरान, मरीज और कर्मचारियों पर न्यूनतम असर के साथ निरंतर उन्नत 4डी रेडिएशन थेरेपी उपचारों की उच्च गुणवत्ता वाली छवियां प्राप्त होती हैं। एक मानव पर लक्षित रेडिएशन से पहले, फैंटम के साथ सिर्फ ट्यूमर पर केंद्रित इसके प्रभाव की जांच की जाती है।

आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर आशीष दत्ता ने संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एसपीजीआईएमएस), लखनऊ के प्रोफेसर के. जे. मारिया दास के साथ मिलकर रेडिएशन थेरेपी में श्वसन संबंधी गतिशील प्रबंधन तकनीकों की गुणवत्ता आश्वासन के लिए प्रोग्राम करने योग्य रोबोटिक मोशन प्लेटफॉर्म विकसित किया है। फैंटम का बड़ा भाग एक गतिशील प्लेटफॉर्म है,

जिस पर कोई भी डोसिमिट्रिक या तस्वीर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली डिवाइस लगाई जा सकती है और प्लेटफॉर्म तीन स्वतंत्र स्टेपर मोटर प्रणालियों के इस्तेमाल से 3डी ट्यूमर मोशन की नकल कर सकता है। यह प्लेटफॉर्म एक बेडपर रखा जाता है, जहां मरीज रेडिएशन थेरेपी के दौरान लेटता है। एक फैंटम जैसे ही फेफड़ों की गति की नकल करता है, वैसे ही रेडिएशन मशीन से रेडिएशन को गतिशील ट्यूमर पर केंद्रित करने के लिए एक गतिशील या गेटिंग विंडो का इस्तेमाल किया जाता है।

फैंटम में लगे डिटेक्टर्स से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि ट्यूमर पर रेडिएशन कहां किया गया है। उपचार के दौरान डोज के प्रभाव की जांच की जाती है। शोधकर्ता एक फैंटम पर प्रणाली की जांच की प्रक्रिया का काम कर रहे हैं। इसके पूरा होने के बाद, वे मानव पर इसकी जांच करेंगे। इस प्रकार के रोबोटिक फैंटम के निर्माण का काम भारत में पहली बार हुआ है और बाजार में उपलब्ध अन्य आयातित उत्पादों की तुलना में यह ज्यादा किफायती है,

क्योंकि फेफड़ों की विभिन्न प्रकार की गति पैदा करने के लिए इस प्रोग्राम को लागू किया जा सकता है। आइआइटी के प्रोफेसर आशीष दत्ता और एसजीपीजीआइ के प्रोफेसर केजे मारियादास के अनुसार फेफड़े के कैंसर के उपचार में यह रोबोट मील का पत्थर साबित होगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार इस तकनीक के आधार पर जल्द ही उपकरण का विकास करेगी।

भारत में इस तरह की अनूठी तकनीक का इजाद पहली बार हुआ है। इससे पूरे विश्व की मानवता को फायदा पहुंचेगा। अब कैंसर रोगियों में फोकस्ड रेडिएशन देना संभव हो जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार के उन्नत तकनीक निर्माण कार्यक्रम की सहायता से विकसित और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ जुड़ी यह तकनीक वर्तमान में एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ में अंतिम दौर के परीक्षण से गुजर रही है।

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