वैज्ञानिकों का दावा, कोरोना वायरस से बचाने में सक्षम नहीं प्लास्टिक शील्ड

कोरोना वायरस ने अपने कहर से पूरी दुनिया की जड़े हिला कर रख दी है। जिसके बाद से दुनियाभर में लोग तरह तरह की तरकीबें निकालकर इससे बचने की कोशिश कर रहे है। इसी बीच लोग सबसे अधिक प्लास्टिक शील्ड को बैरियर के रूप में इस्तेमाल कर रहे है। लोगों को लगता है कि प्लास्टिक शील्ड वायरस से सुरक्षा दिलाएगी।

किंतु एक स्टडी के मुताबिक, शील्ड खांसने व छींकने के दौरान निकले बड़े कण तो रोक सकती हैं, पर बातचीत में निकले कणों को फैलने से रोकने में सक्षम नहीं है। जबकि कोरोना तो अनदेखे एयरोसोल कणों से फैलता है, इसलिए शील्ड की उपयोगिता सवालों के घेरे में है।

लीड्स यूनिवर्सिटी में पर्यावरण इंजीनियरिंग विशेषज्ञ कैथरीन नोक्स कहती हैं, ‘छोटे एयरोसोल शील्ड पर ट्रैवल करते हैं और 5 मिनट में कमरे की हवा में मिल जाते हैं। यानी लोग कुछ देर तक बात करते हैं तो स्क्रीन के होते हुए भी वायरस के संपर्क में आ सकते हैं। वैसे भी शील्ड जिस तरह लगाई जाती हैं, उनसे बहुत फायदा मिलने की संभावना नहीं है।’

एयरोसोल, एयरफ्लो और वेंटिलेशन की स्टडी करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्यादातर वक्त ये बैरियर कारगर नहीं होते। बल्कि स्थिति को और खराब कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे लोगों को झूठी सुरक्षा का अहसास होता है। इसलिए इन पारदर्शी शील्ड को पूरी सुरक्षा के रूप में नहीं देखना चाहिए। जोखिम कम करने के लिए मास्क पहनना जारी रखना चाहिए।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending