वैज्ञानिकों का दावा, सैनेटाइजर का ज्यादा उपयोग अंधेपन का कारण बन सकता है

कोरोना महामारी के दौरान दुनियाभर में लोगो ने हैंड सैनेटाइजर का काफी मात्रा में इस्तेमाल किया। जिसके कारण अंधेपन के मामले बढ़ते जा रहे है। जी हां, मेयो क्लीनिक के वैज्ञानिकों के अनुसार, जो लोग सैनेटाइजर का अधिक इस्तेमाल करते हैं उनकी आंखों की रोशनी जाने के साथ मौत भी हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सैनेटाइजर का अधिक इस्तेमाल करने पर बैक्टीरिया रेसिस्टेंस विकसित कर लेती है, नतीजा, ये उन पर बेअसर साबित होता है। अगर आप घर या बाथरूम में हैं तो हैंड सैनेटाइजर की जगह साबुन-पानी से हाथ धोएं। साबुन हाथों से चिपचिपापन खत्म करता है, इसलिए वायरस स्किन पर नहीं टिक पाता। वैज्ञानिकों की माने तो, हैंड सैनेटाइजर में तीन तरह के अल्कोहल इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें से एक का नाम मेथेनॉल है।

इसका अधिक इस्तेमाल करने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खत्म हो सकती है या मौत भी हो सकती है।अमेरिका में मेथेनॉल वाले हैंड सैनेटाइजर बनाने पर बैन लगा दिया गया है। मेथेनॉल की जगह एथेनॉल और आइसोप्रोपेनॉल को सुरक्षित विकल्प माना गया है। वहीं, कई देशों में इस्तेमाल हो रहे सैनेटाइजर में मेथेनॉल मौजूद है।
बच्चों की स्किन के जरिए मेथेनॉल शरीर में पहुंचकर लम्बे समय सेहत पर बुरा असर डालता है। डॉक्टर्स का कहना है, हैंड सैनेटाइजर का इस्तेमाल तभी करें जब वाकई में इसकी जरूरत हो।

इसे रोजाना इस्तेमाल करने की जगह, कभी-कभार इस्तेमाल करें वो भी कम मात्रा में।15 मामलों में से 4 की मौत हो गई थी। 3 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। विशेषज्ञ कहते हैं, हैंड सैनेटाइजर के ओवरयूज से बचें।
मेयो क्लीनिक के संक्रमक रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्रेगोरी पोलैंड का कहना है, बच्चे सैनेटाइजर का अधिक इस्तेमाल करते हैं तो उनकी स्किन मेथेनॉल को एब्जॉर्ब कर लेती है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी को पिछले साल मेक्सिको और एरिजोना में मेथेनॉल पॉइजनिंग के 15 मामले मिले थे। इन सभी मामलों में हैंड सैनेटाइजर का अधिक इस्तेमाल किया गया था।

ब्रिघम एंड वुमेन्स हॉस्पिटल के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अबिगैल वॉल्डमैन का कहना है, हमारी स्किन ईटों की दीवार की तरह है। हैंड सैनेटाइजर हमें वायरस से बचाता है, लेकिन कई बार ये उसी ईटों की दीवार में सुराग कर देता है। इस तरह यह शरीर में पहुंचता है। अल्कोहल की मात्रा अधिक होने के कारण यह स्किन एलर्जी की वजह भी बन सकता है।

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