नई दिल्ली, 14 फरवरी (इंडिया साइंस वायर): दुनिया भर में बीमारी से होने वाली मृत्यु के कारणों में कैंसर प्रमुखता से शामिल है। विशिष्ट कीमो दवाओं के स्थान पर बेहतर चिकित्सीय उपचार की खोज कैंसर से निपटने के लिए नयी रणनीतियाँ तैयार करने में मददगार रही हैं। आरएनए इंटरफेरेंस आरएनएआई (RNAi) जीन साइलेंसिंग दृष्टिकोण; कैंसर जैसी जटिल बीमारियों के लिए लक्षित एवं विशेष उपचार के लिए एक आशाजनक उपकरण के रूप में उभर रहा है।

जैविक प्रणालियों में आरएनएआई अणुओं (RNAi Molecules) की सुरक्षित और प्रभावी प्रतिपादन विधियों की कमी आरएनएआई-आधारित थेरेपी का उपयोग करने की दिशा में एक प्रमुख चुनौती है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की हैदराबाद स्थित घटक प्रयोगशाला सीएसआईआर-कोशकीय एवं आणविक जीवविज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) के वैज्ञानिकों ने RNAi (Ephb4 shRNA) और अन्य अणुओं को एनकैप्सुलेट करने के लिए हल्दी से प्राप्त नैनो-करक्यूमिन संरचनाएँ विकसित की हैं, जो विशिष्ट ऊतकों को लक्षित करने में सहायता करती हैं।

सीएसईआईआर-सीसीएमबी की वैज्ञानिक डॉ लेखा दिनेश कुमार और उनकी टीम ने यह अध्ययन पुणे स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (एनसीएल) के पॉलिमर साइंस ऐंड इंजीनियरिंग डिविजन के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर किया है। यह प्रस्तावित जैविक-दवा (Bio Drug) विष-रहित, जैविक रूप से सुसंगत और उच्च अवशोषण क्षमता से लैस है। कोलन एवं स्तन कैंसर के दो अलग-अलग चूहे के मॉडलों में ट्यूमर के धीमी गति के बढ़ने के साथ इस दवा की साइट-विशिष्ट प्रभावी डिलिवरी देखी गई है।

डॉ कुमार ने कहा कि – “आरएनएआई (RNAi) के साथ उच्च कैंसर विरोधी और सूजन-रोधी क्षमताओं के साथ बहु-प्रचलित न्यूट्रास्यूटिकल, कुरक्यूमिन के उपयोग ने कोलन एवं स्तन कैंसर के अति आक्रामक मॉडल में छह महीने तक जीवित रहते हुए ट्यूमर की बढ़ती गति कमी देखी गई है।” एक अन्य शोध में, स्कूल ऑफ नैनोसाइंसेज, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय और सेंटर फॉर एडवांस्ड मैटेरियल्स ऐंड इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, आरएमआईटी, ऑस्ट्रेलिया के साथ शोधकर्ताओं ने कोलन कैंसर को लक्षित करने के लिए एक पर्यावरण अनुकूल और पीएच-अनुक्रियाशील पथ्य फाइबर इनुलिन-आधारित नैनो उपकरण तैयार किया है।

यह उपकरण बेहतर जैविक अपघटन, ऊतक संचय और कम विषाक्तता से जैविक-दवा (Bio Drug) फॉर्मूलेशन में प्राकृतिक यौगिकों के साथ सिंथेटिक पदार्थों को प्रतिस्थापित करने की संभावना का सुझाव देता है। इस शोध का परिणाम नैनो-मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है। डॉ कुमार ने कहा है कि “इस शोध में, हमने दिखाया है कि आरएनएआई (RNAi) उपयुक्त लक्षित एजेंटों और प्राकृतिक बायोमैटिरियल्स से बने इनकैप्सुलेशन के साथ मिलकर कैंसरग्रस्त चूहों के मॉडल में अधिक परिवर्तन क्षमता रखता है।

जैविक-दवाओं का यह वर्ग भविष्य में कैंसर चिकित्सा-विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। नैदानिक परीक्षणों में इन चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता को सामने लाने के लिए अन्य कैंसर मॉडल प्रणालियों में इसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए।” इस अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं में डॉ लेखा दिनेश कुमार के अलावा अविरल कुमार, अमरनाथ सिंगम, गुरुप्रसाद स्वामीनाथन, नरेश किल्ली, नवीन कुमार तांगुडु, जेडी जोसे और रत्ना गुंडलूरी वीएन शामिल हैं। यह अध्ययन शोध पत्रिका नैनोस्केल में प्रकाशित किया गया है।

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