शोधकर्ताओं का दावा; बिना इंजेक्शन के अब पसीने से पता चलेगा ब्लड शुगर का लेवल

अमेरिकी पेन्सिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी डिवाइस बनाकर तैयार की है जो पसीने से ब्लड शुगर के लेवल का पता लगाने में सक्षम है। शोधकर्ताओं का मानना है की, ब्लड के मुकाबले पसीने में ग्लूकोज की मात्रा 100 गुना तक काम होती है। इसलिए डिवाइस में ऐसी मेटल का प्रयोग किया गया है जो इसे पकड़ सके। जो पसीने से ग्लूकोज का स्तर पता लगाने की कोशिश करता है।

दरअसल इस डिवाइस को हाथ में पहनकर ब्लड शुगर की जांच की जा सकेगी। हालिया तैयार हुई डिवाइस को स्किन से सटाकर लगाते हैं। इसके बाद मरीज को हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी करने की सलाह दी जाती है ताकि स्किन पर पसीना आ सके। पसीना आने के कुछ मिनट बाद यह यह डिवाइस पसीने की जांच करके नतीजे बताती है। यह रिसर्च बायोसेंसर्स एंड बायोइलेक्ट्रॉनिक्स जर्नल में पब्लिश हुई है।

डायबिटीज के प्रकार डायबिटीज दो तरह के होते हैं:-

टाइप-1 डायबिटीज: डायबिटीज के रोगी के शरीर में इन्सुलिन का निर्माण आवश्यकता से कम होता है। इस अवस्था को बाहर से इन्सुलिन देकर नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें रोगी का अग्न्याशय या पैनक्रियास की बीटा कोशिकाएँ इन्सुलिन नहीं बना पाती जिसका उपचार लगभग असम्भव है। यह प्रकार बच्चों को एवं 18-20 साल तक के युवाओं को प्रभावित करता है।

टाइप-2 डायबिटीज: रोगी का शरीर इन्सुलिन का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। इसमें शरीर इन्सुलिन बनाता तो है लेकिन कम मात्रा में और कई बार वह इन्सुलिन अच्छे से काम नहीं करता। टाइप-1 डायबिटीज को उपचार और उचित खानपान से नियंत्रित किया जा सकता है। यह डायबिटीज वयस्कों को होता है।

इसके शुरुआती लक्षण – :

• बेचैनी

• कपकपी

• ज्यादा भूख लगना 

• पसीना आना 

कुछ गंभीर केसेस में ये लक्षण भी आ सकते है :-

• बेहोशी 

• दौरा पड़ सकता

• व्यवहारिक बदलाव 

• शुगर लेवल कम होना आम तौर पर डायबिटीज टाइप-1 और टाइप-2 से जूझ रहे मरीज़ो में होता है। इसमें ज्यादातर मामले हल्के और सामान्य होते है, इमरजेंसी वाले नहीं होते। 

कारण

मोटापा डायबिटीज के लिए जिम्मेदार होता है। समय पर न खाना या अधिक जंकफूड खाना और मोटापा बढ़ना डायबिटीज के कारण है। वजन बहुत ज्यादा बढ़ने से उच्च रक्तचाप की समस्या हो जाती है और रक्त में कॉलेस्ट्रोल का स्तर बहुत बढ़ जाता है जिस कारण डायबिटीज हो सकता है। बहुत अधिक मीठा खाने, नियमित रुप से जंक फूड खाने, कम पानी पीने, एक्सरसाइज न करने, खाने के बाद तुरंत सो जाने, आरामपरस्त जीवन जीने और व्यायाम न करने वाले लोगों में डायबिटीज होने की संभावना अधिक है।

वर्तमान में बच्चों में होने वाली डायबिटीज का मुख्य कारण आजकल का रहन-सहन और खान-पान है। आजकल बच्चे शारीरिक रुप से निक्रिय रहते है और अधिक देर तक टी.वी. या वीडियो गेम्स खेलने में समय व्यतीत करते है जिस कारण डायबिटीज होने का खतरा ज्यादा रहता है। इससे बचने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरुरी है। डायबिटीज के लिए जिम्मेदार एक कारण अनुवांशिकता को भी माना जाता है। यदि परिवार के किसी सदस्य माँ-बाप, भाई-बहन में से किसी को है तो डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

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