रामायण: आज भी जिंदा है त्रेता युग के ये सात लोग

रामायण तो हम बचपन से सुनते आ रहें है इसके हर हिस्से से हम सभी वाकिफ है। रामायण काल आज से 7 हजार वर्ष पूर्व पुराना है। लेकीन क्या आप जानते है रामायण काल से जुड़े 7 लोग आज भी है जिंदा, आइए जानिए कौन है वो लोग।  1. हनुमान जी : प्रभु श्रीराम के भक्त हनुमानजी आज भी जिंदा है। प्रभु श्रीराम और माता सीता की कृपा से वे एक कल्प तक इस धरती पर सशरीर ही रहेंगे। 
2. विभीषण : भगवान श्री राम ने रावण के अनुज विभीषण को अजर-अमर होने का वरदान दिया था। विभीषण जी सप्त चिरंजीवियों में एक हैं और अभी तक विद्यमान हैं। विभीषण को भी हनुमानजी की तरह चिरंजीवी होने का वरदान मिला है। वे भी आज सशरीर जीवित हैं।
 3. जामवंत : अग्नि के पुत्र जाम्बवन्त को भी प्रभु श्रीराम से कल्प के अंत तक जीवित रहने का वरदान मिला हुआ है। सृष्टि के आदि में प्रथम कल्प के सतयुग में जामवन्तजी उत्पन्न हुए थे। जामवन्त ने अपने सामने ही वामन अवतार को देखा था। 
 4. परशुराम : भगवान विष्णु के छठे आवेश अवतार परशुराम आज भी जीवित हैं। कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें कल्प के अंत तक तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया। भगवान परशुराम किसी समाज विशेष के आदर्श नहीं है। वे संपूर्ण हिन्दू समाज के हैं और वे चिरंजीवी हैं। 
ऐसा माना जाता है कि वे कल्प के अंत तक धरती पर ही तपस्यारत रहेंगे। पौराणिक कथा में वर्णित है कि महेंद्रगिरि पर्वत भगवान परशुराम की तप की जगह थी और अंतत: वह उसी पर्वत पर कल्पांत तक के लिए तपस्यारत होने के लिए चले गए थे

 5. काकभुशुण्डि : भगवान गरुड़ को रामकथा सुनाने वाले काकभुशुण्डि को उनके गुरु लोमश ऋषि ने इच्छामृत्यु का वरदान दिया था। दरअसल, लोमश ऋषि के शाप के चलते काकभुशुण्डि कौवा बन गए थे। लोमश ऋषि को बाद में इसका पश्चाताप हुआ। तब उन्होंने काकभुशुण्डि को बुलाकर शाप से मु‍क्त होने के साथ ही राम मंत्र दिया और इच्छामृत्यु का वरदान भी दिया।

 6. मुचुकुन्द : मान्धाता के पुत्र मुचुकुंद त्रेतायुग में इक्ष्वाकु वंश के राजा थे। मुचुकुन्द की पुत्री का नाम शशिभागा था। एक बार देवताओं के बुलावे पर देवता और दानवों की लड़ाई में मुचुकुंद ने देवताओं का साथ दिया था जिसके चलते देवता जीत गए थे। तब इन्द्र ने उन्हें वर मांगने को कहा। उन्होंने वापस पृथ्वीलोक जाने की इच्छा व्यक्त की। 

7.लोमश ऋषि : लोमश ऋषि परम तपस्वी तथा विद्वान थे। इन्हें पुराणों में अमर माना गया है। पीलोमश ऋषि बड़े-बड़े रोमों या रोओं वाले थे। इन्होंने भगवान शिव से यह वरदान पाया था कि एक कल्प के बाद मेरा एक रोम गिरे और इस प्रकार जब मेरे शरीर के सारे के सारे रोम गिर जाऐं, तब मेरी मृत्यु हो। 

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