राकेश टिकैत ने मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, हम शांति से बैठे हैं हमें छेड़ो नहीं

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारी किसानो को आंदोलन करते 7 महीने से अधिक का वक्त हो चुका है। एक तरफ जहां प्रदर्शन कर रहे किसान कृषि कानूनों को लगातार रद्द करने की मांग पर अड़ा हुआ है तो वहीं सरकार साफ कर चुकी है कि वो इस बिल को वापस नहीं करेंगी। सरकार और किसानों के बीच जारी तनातनी के बाद भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने एक फिर सरकार को चेतावनी दी है।

टिकैत ने कहा कि सरकार चाहे लाठी-डंडे का इस्तेमाल कर ले, लेकिन जो भी बात होगी वो बिना किसी कंडीशन के होगी। राकेश टिकैत ने आगे कहा कि सरकार का जो ताज़ा प्रस्ताव सामने आया है, वो शर्तों के साथ है। एक तरफ सरकार बात करने को कह रही है और दूसरी तरफ ये भी कह रही है कि कानून वापस नहीं होगा। टिकैत ने कहा कि हमने कोई शर्त नहीं लगाई है, अगर सरकार कानून वापसी को लेकर चर्चा करने को तैयार है तो किसान बातचीत शुरू करना चाहते हैं।

बता दें कि किसान और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने आगे कहा कि हम आठ महीने से आर-पार के मूड में ही बैठे हैं, जो जिस भाषा में आर-पार समझता हो, वही समझे। टिकैत ने कहा कि हम शांति से बैठे हैं, हमें छेड़ो नहीं और सरकार कह रही है कि यहां से चले जाओ। टिकैत ने कहा, अगर हम जाएंगे तो बातचीत से जाएंगे, वरना लाठी-डंडे-गोली जिससे सरकार भगाना चाहे हमें भगा दें।

सरकार पर वार करते हुए टिकैत ने कहा कि-
“हम आठ महीने से आर-पार के मूड में ही बैठे हैं, जो जिस भाषा में आर-पार समझता हो, वही समझे। हम शांति से बैठे हैं, हमें छेड़ो नहीं और सरकार कह रही है कि यहां से चले जाओ। अगर हम जाएंगे तो बातचीत से जाएंगे, वरना लाठी-डंडे-गोली जिससे सरकार भगाना चाहे हमें भगा दें। सरकार अगर किसी पार्टी की होती तो हमसे जरूर बात करती, लेकिन यहां कंपनियां सरकार को चला रही है और देश को लूटकर अपना जेब भर रही है। ऐसे में देश की जनता को सड़कों पर उतरकर लुटेरों को भगाना होगा, ये ही आखिरी बादशाह साबित होगा।”

बता दें, गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) द्वारा इस बात का भी ऐलान किया था कि अगस्त महीने से उनके द्वारा उत्तर प्रदेश में जिलावार आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की दिक्कतें, महंगी बिजली समेत अन्य कई मसलों पर जोर दिया जाएगा।

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