निर्माता दुर्बा सहाय ने दिल्ली में आयोजित की फिल्म आवर्तन की एक विशेष स्क्रीनिंग

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्माता दुर्बा सहाय जो अभिनव विचारों से भरपूर कई लघु फिल्मों को लिखने और निर्देशित करने के लिए भी जानी हैं,  ने निर्देशक के रूप में अपनी पहली फीचर फिल्म आवर्तन बनाई हैं, जिसका दिल्ली में एक विशेष स्क्रीनिंग किया गया। यह कार्यक्रम इंडिया हैबिटेट सेंटर में अनेकगण – मान्य अतिथियों की उपस्थिति में हुआ।

इंडियन पैनोरमा फीचर फिल्म सेक्शन के तहत भारत के 51 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2020 में आवर्तन का चयन किया गया है। फिल्म चार पीढ़ियों को दिखाती है कि एक शिक्षक-शिष्य की यात्रा कैसे शुरू होती है, कैसे विकसित होती है और समाप्त होती है, और एक नयाचक्र कैसे शुरू होता है।

इस फिल्म को बनाने के पीछे का मकसद उन युवाओं का ध्यान आकर्षित करना है जो अपनी कला विरासत एवं सांस्कृतिक जड़ों को भूल रहे हैं। फिल्म में सुषमा सेठ, पद्म श्री शोवना नारायण, सुनीतराजदान, मृणालिनी और गुरजीत सिंह चन्नी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

फिल्म के बारे में

फिल्म एक स्थापित और प्रख्यात कत्थक नृत्यांगना के इर्द-गिर्द घूमती है। जब वह अपने  एक शिष्या का मंच प्रवेश करती है, जो रातो रात स्टार बन जाती है और लाइम लाइट का स्वाद चखने  के बाद, शिष्या ने अपने गुरु से एक कदम आगे बढ़ने का विकल्प चुना और अपने गुरु से विरासत में मिली हुई नृत्य कला में नए आयाम जोड़ना शुरू कर देती है, जिससे गुरु  में असुरक्षा और पहचान के संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। एक ही समय में फिल्म गुरू-शिष्य रिश्ते के चक्र को दर्शाती है, यह कैसे शुरू होता है, विकसित होता है, समाप्त होता है और फिर से एक नयाचक्र शुरू होता है,  इस तरह ये फिल्म गुरु शिष्य परंपरा की चार पीढ़ी को प्रदर्शित करती हैं।

निर्देशक दुर्वा सहाय के बारे में –

Film Director and writer Durba Sahay 1

दुर्वा सहाय का जन्म 16 दिसंबर 1962 को बिहार के गया में हुआ था।  खुद को एक लेखक के रूप में स्थापित करने के बाद, दुर्बा सहाय ने “दपेन” के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की, (लघु फिल्म कार्नर – फेस्टिवल डी कान्स 2011 में प्रदर्शित) कला प्रदर्शन में प्रवेश करते हुए दुर्वा ने थिएटर और

Rachana Yadav

फिल्मों की अलग-अलग अखाड़ों में काम किया है, जिसमें विभिन्न क्षमताएँ भी शामिल हैं। नाटककार, अभिनेता, निर्देशक, पटकथा लेखक और प्रोडक्शन डिज़ाइनर। लघु कथाओं के संग्रह “रफ़्तार” के लेखक, दुर्वा सहाय ने “ऐनअननोनगेस्ट ” (लघु फिल्म का र्नर – फेस्टिवल डी कान्स 2012 में प्रदर्शित), “दमैकेनिक” (लघु फिल्म कार्नर – फेस्टिवल डी कान्स 2013 में प्रदर्शित) और “पेटल्स” (लघु फिल्म कॉर्नर – महोत्सव डी कान्स 2014 में प्रदर्शित)।

L RVidyun Singh and Suneet Tandon

दुर्वा सहाय को “पतंग” के निर्माण के लिए “सिल्वर कमल” से भी सम्मानित किया गया, जिसे गौतम घोष द्वारा निर्देशित १९९३ के सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म के रूप में पुरस्कृत किया गया। दुर्वा का अपना एक सांस्कृतिक केंद्र भी है, जिसमे सुसज्जित ऑडिटोरियम और थियेटर रिपर्टरी शामिल है । जिसने कई नाटकों का निर्माण किया है और देश के विभिन्न हिस्सों में मंचन किया गया है। साथ ही सांस्कृतिक केन्द्र प्रदर्शनियों, कार्यशालाओं, त्योहारों, नृत्य और संगीत कार्यक्रमों का आयोजन करता है।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending