प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल प्राइज़ फ़ॉर वॉटर

नवनीत कुमार गुप्ता
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के प्रोफेसर थलपिल प्रदीप को प्रतिष्ठित ‘प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल प्राइज़ फ़ॉर वॉटर’ (PSIPW) के 10वें संस्करण के विजेता के रूप में चुना गया है। उन्हें पानी से संबंधित किसी भी क्षेत्र में ‘सफलता की खोज’ के लिए दिए गए ‘रचनात्मकता पुरस्कार’ श्रेणी के तहत पुरस्कार के लिए चुना गया है। प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअज़ीज़ अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जल अनुसंधान में अत्याधुनिक नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने वाला एक अग्रणी, वैश्विक वैज्ञानिक पुरस्कार है। यह दुनिया भर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अन्वेषकों को अग्रणी कार्य के लिए मान्यता देता है जो रचनात्मक और प्रभावी तरीकों से पानी की कमी की समस्या का समाधान करता है।

द्वि-वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पुरस्कार 21 अक्टूबर 2002 को सऊदी अरब के राजकुमार सुल्तान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद द्वारा स्थापित किया गया था। पुरस्कार में एक स्वर्ण पदक, एक ट्रॉफी और एक प्रमाण पत्र के अलावा 2,66,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2 करोड़ रुपये) का नकद घटक शामिल है।

पुरस्कार समारोह 12 सितंबर 2022 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होगा। इस पुरस्कार में प्रोफेसर टी. प्रदीप की टीम के सदस्यों श्री अवुला अनिल कुमार, श्री चेन्नू सुधाकर, सुश्री श्रीतामा मुखर्जी, श्री अंशुप और श्री मोहन उदय शंकर का भी उल्लेख है।

प्रोफेसर टी. प्रदीप के अनुसंधान समूह ने पीने के पानी से आर्सेनिक को किफायती, टिकाऊ और तेजी से हटाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल ‘वाटर पॉजिटिव’ नैनोस्केल सामग्री विकसित की है। प्रोफेसर प्रदीप को पहले पद्म श्री, और निक्केई एशिया पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, और उनकी तकनीक 1.2 करोड़ से अधिक लोगों को स्वच्छ पानी पहुंचा रही है।

आईआईटी मद्रास के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर प्रोफेसर टी. प्रदीप ने भविष्य की परियोजनाओं पर बात करते हुए कहा, “पानी के हर क्षेत्र में बहुत कुछ करना है जैसे विलवणीकरण, आर्द्रता संचयन, संवेदन और पुनर्चक्रण। हमारी टीम उनमें से प्रत्येक पर काम कर रही है। यह क्षेत्र सभी के योगदान के लिए खुला है।”

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