पागल बाबा मंदिर: एक ऐसा मंदिर जहां भगवान खुद गवाही देने अदालत पहुंचे…

मथुरा जहां कण-कण में भगवान का श्री कृष्ण वास है। जिसे श्री कृष्ण की जन्म भूमि कहा जाता है। मथुरा के हर हिस्से में आपको श्री कृष्ण और राधा रानी को झलक दिखाई देगी। दुनियाभर से लोग यहां भगवान के दर्शनों के लिए आते-जाते रहते हैं। कहते है अगर भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा, प्रेम और लगाव हो तो वह अपने भक्त को कभी अकेला नहीं छोड़ते कहा जाता है की दुख की घड़ी में भी भगवान किसी ना किसी रूप में अपने भक्तो की मदद के लिए आगे आता है। आज हम आपको ऐसी ही एक सच्ची कहावत बताने जा रहें है जो वर्तमान समय में बेहद कम लोग ही जानते है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि श्री कृष्ण अपने किसी भक्त के लिए कोर्ट में भी पेश हुए हैं। जी हां, आज हम आपको बांके बिहारी के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहें हैं जिसका नाम और कहानी दोनों ही बेहद दिलचस्प है। तो आइए जानते हैं इस भव्य मंदिर के बारे में-

वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा एक मंदिर स्थित है जो पागल बाबा के नाम से विश्व प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान के एक परम भक्त ने बनवाया है। यह मंदिर वृंदावन में बनाया गया है। पौराणिक कथानुसार, एक गरीब ब्राह्मण जो श्री कृष्ण का बहुत बड़ा भक्त था। वो पूरा दिन ठाकुर जी का नाम जपता रहता था। उसके पास जितना भी धन होता या यूं कहें कि जितना भी रूखा-सूखा उसे खाने को मिलता वे उसे भगवान की मर्ज़ी समझकर खुशी-खुशी जीवन व्यतीत करता।एक बार उसे कुछ पैसों की जरूरत पड़ी तो वो किसी साहुकार से पैसे लेने गया। साहुकार ने पैसे देते हुए कहा कि उसे जल्द ही पैसे लौटाने होंगे। उसकी बात मानकर वो पैसे लेकर घर आ गया। वे ब्राह्मण हर महीने किश्त के हिसाब से साहुकार के पैसे लौटा रहा था। आखिरी किश्त के थोड़े दिन पहले ही साहुकार ने पैसे न लौटाने का समन पत्र उसके घर भिजवा दिया। ये देखकर ब्राह्मण बहुत परेशान हुआ और वो साहुकार से विनती करने लगा लेकिन साहुकार नहीं माना। कोर्ट में जाकर भी ब्राह्मण ने जज से यही बोला कि एक किश्त के अलावा मैने सारा कर्ज़ चुकाया है। ये साहुकार झुठ बोल रहा है। ये सब सुनकर साहुकर ने ब्राह्मण से कहा कोई ग्वाह है जिसके सामने तुमने साहुकार को धन लौटाया हो। इतना सुनकर वो सोच में डूब गया कि ये तो मैंने सोचा ही नहीं कि जब मैंने साहुकार को पैसे वापिस लौटाए तब उसके अलावा तो किसी ने मुझे पैसे देते हुए देखा ही नहीं। उसने इस बारे में बहुत सोचा और अंत में अपने भगवान को याद करते हुए उसने बांके बिहारी का नाम लिया। 

अदालत ने मंदिर का पता नोट करा दिया। अदालत की ओर से मंदिर के पते पर सम्मन जारी कर दिया गया। वह नोटिस बिहारीजी के सामने रख दिया गया। बात आई गई हो गई। गवाही के दिन एक बूढ़ा आदमी जज के सामने गवाह के तौर पर पेश हुआ। उसने कहा कि पैसे देते समय मैं साथ होता था और इस-इस तारीख को रकम वापस की गई थी। जज ने सेठ का बही- खाता देखा तो गवाही सही निकली। रकम दर्ज थी, नाम फर्जी डाला गया था। जज ने ब्राह्मण को निर्दोष करार दिया। लेकिन उसके मन में यह उथल पुथल मची रही कि आखिर वह गवाह था कौन। उसने ब्राह्मण से पूछा। ब्राह्मण ने बताया कि बिहारीजी के सिवा कौन हो सकता है। इस घटना के बाद जज इतना हक्का-बक्का रह गया कि उसने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और यहां तक कि उसने अपना घर-परिवार तक छोड़ दिया और फकीर बन गया। 

मान्यता के अनुसार बहुत सालों बाद वो जज पागल बाबा के नाम से वृंदावन वापिस आया और उसने बांके बिहारी के मंदिर का निर्माण करवाया। तब से ये मंदिर पागल बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आज भी उस जज को समर्पित पागल बाबा नाम का विशाल मंदिर वृन्दावन में स्थित है। कहा जाता है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता। यहां भक्तोंं की हर मनोकामना पागल बाबा और कान्हा ज़रूर सुनते हैं। पागल बाबा का ये आश्रम बहुत ही चमत्कारिक है यहां आने वाले भक्तों को सकारात्मकता का अनुभव होता है। 

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