औवेसी ने राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट पर खड़े किए सवाल कहा- हमारी नस्ले भी याद रखेगी सुप्रीम कोर्ट के धोखे को….

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवहेलना करते हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस का राग अलापा है। एक निजी चैनल के एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने कहा कि जब तक वह जिंदा रहेंगे, तब तक मुस्लिम समाज को बताएँगे कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बाबरी मस्जिद को तोड़ा है। असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा अयोध्या में मस्जिद थी, है और हमेशा रहेगी।

राम मंदिर को लेकर ओवैसी का ये रुख पहली बार सामने नहीं आया है। इसके पहले भी कई बार वे राम मंदिर को नकार चुके हैं और फैसले के कारण सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने पिछले साल (2020 में) बाबरी मस्जिद गिराए जाने की तारीख 6 दिसंबर को कहा था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद 400 सालों तक खड़ी थी, इसे आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाने और सिखाने की जरूरत है।

शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान एंकर द्वारा पूछे गए सवाल पर की ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है और पर्यटक भी जा रहे, तो आप भगवान श्रीराम का दर्शन करने जाएँगे?’ का जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा, “इस बारे में खुलकर कहता रहा हूँ और आज भी कह रहा हूँ कि जब तक हम जिंदा रहेंगे, हमारी नस्लों को हम बताते रहेंगे कि आजाद भारत में सुप्रीम कोर्ट को धोखा देकर बाबरी मस्जिद को बीजेपी ने शहीद किया था।”

खुद को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी बताने वाले ओवैसी ने सवालिया लहजे में कहा, “बीजेपी वहाँ मस्जिद शहीद नहीं करती तो क्या ये आज का फैसला आता?” उन्होंने कहा, “वो मेरी मस्जिद थी, है और हमेशा रहेगी।” इस पर भाजपा नेता सिद्धार्थनाथ सिंह ने ओवैसी पर पलटवार करते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला का जन्मस्थान था और कोई कब्जा करेगा तब भी रहेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को धोखा देने की बात सिर्फ ओवैसी ही कह सकते हैं। भारत का कोई दूसरा नागरिका ऐसा नहीं कहेगा।

बता दें की ओवैसी पहले भी ऐसी बाते कर चुके है पिछले साल दिसंबर में ही उन्होंने राम मंदिर पर फैसले को नाइंसाफी बताते हुए कहा था की हमारी आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाएँ और उन्हें सिखाएँ कि 400 से अधिक सालों तक अयोध्या में बाबरी मस्जिद खड़ी थी। इस मस्जिद के हॉल में हमारे पूर्वज इबादत करते थे। वे इसके आंगन में रोजा तोड़ते थे और जब उनकी मौत हो जाती थी तो पास के ही कब्रिस्तान में उन्हें दफनाया जाता था। 1992 में पूरी दुनिया के सामने हमारी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। इसके जिम्मेदार लोगों को एक दिन की भी सजा नहीं हुई। इस नाइंसाफी को कभी मत भूलिए।

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