कंगना रनौत के बयान पर देशभर में आक्रोश, दर्ज हुई सैकड़ो शिकायते, सड़कों पर फूंके गए पुतले, लोगों ने लगाए कंगना मुर्दाबाद के नारे

हमेशा अपने बयानों की वजह से विवादों में बनी रहने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत की मुश्किलें अब बढ़ती जा रही है। देश के कोने कोने से कंगना के खिलाफ आवाजें उठनी लगी है। लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर कंगना से पद्म श्री वापस लेने की मांग कर रहे है। कुछ लोगों ने बीते दिन सड़कों पर कंगना के पुतले भी फूंके है। दरअसल, पिछले दिनों उन्होंने देश की आजादी को भीख बताया था और असली आजादी सन 2014 यानी मोदी सरकार के आने को बताया था। जिस पर ना केवल विपक्षी पार्टी ही बल्कि खुद बीजेपी ने भी कड़ा ऐतराज जताया है।

भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि अभिनेत्री कंगना रनौत का यह बयान कि 1947 में भारत को मिली आजादी ‘भीख’ थी, पूरी तरह गलत है। पाटिल ने कहा, “स्वतंत्रता के लिए देश के संघर्ष पर कंगना रनौत का बयान पूरी तरह गलत है। किसी को भी स्वतंत्रता आंदोलन पर नकारात्मक टिप्पणी करने का हक नहीं है।

” उन्होंने दावा किया, “2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आम आदमी सच्ची आजादी का अनुभव कर रहा है। अब देश में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसे रोज दो वक्त का खाना नसीब नहीं होता हो। केंद्र सरकार 105 रुपये में गरीबों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न दे रही है।”

पाटिल ने कहा कि रनौत प्रधानमंत्री मोदी के सात साल के कामकाज की तारीफ कर सकती हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन की आलोचना करने का अधिकार नहीं है। दूसरी तरफ दिल्ली भाजपा नेता प्रवीण शंकर कपूर ने कंगना रनौत की निंदा की और उनके खिलाफ न्यायिक कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने कहा कि रनौत की टिप्पणी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। उन्होंने ट्वीट किया, “एक स्वतंत्रता सेनानी का पुत्र होने एवं स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से आने का कारण कंगना रनौत द्वारा भारत की आजादी को भीख मे मिली आजादी कहना, मुझे स्वतंत्रता का सबसे बड़ा दुरुपयोग एवं स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग का अपमान लगता है।”

इस बीच महात्मा गांधी के पड़पौत्र तुषार गांधी ने शुकव्रार को अभिनेत्री को नफरत का एक एजेंट बताया। उन्होंने ट्वीट किया, “पद्मश्री कंगना रनौत नफरत, असहिष्णुता और अनर्गल उत्साह की एजेंट है। यह हैरानी की बात नहीं है कि उन्हें लगता है कि भारत को आजादी 2014 में मिली। घृणा, असहिष्णुता, दिखावटी देशभक्ति और दमन को भारत में 2014 में आजादी मिली।

” उन्होंने कहा, “यह हैरानी की बात नहीं है कि ऐसे बयान उस कार्यक्रम में दिए गए, जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल हुए। आखिरकार आज पीएमओ नफरत का झरना बन गया है जो प्रचुर मात्रा में हमारे देश में बहता है।”
वहीं केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ने कंगना के बयान का जवाब देते हुए कहा कि असली आजादी 1947 में ही मिली थी और ऐसे विषय वही लोग उठाते हैं जिनके सोचने समझने की हैसियत उतनी ही है।

इससे पहले बीजेपी नेता वरुण गांधी ने कंगना के बयान का वीडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा था, “कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूं या फिर देशद्रोह?”

बता दें एक्ट्रेस के विवादित बयान पर देश भर में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग हो रही है और कई जगहों पर उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कंगना के खिलाफ दो जगहों पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। रुड़की और ज्वालापुर में दर्ज शिकायतों में कंगना के ऊपर स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। वहीं महिला कांग्रेस की ओर से राजस्थान के चार शहरों जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और चूरू में फिल्म अभिनेत्री के खिलाफ इसी मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। 

इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने मुंबई पुलिस को शिकायत की एक अर्जी देते हुए कंगना रनौत के खिलाफ एक मामला दर्ज करने की मांग की थी। इसमें कंगना के खिलाफ आईपीसी की धारा- 504, 505 और 124(ए) के तहत केस दर्ज करने की मांग की गई। AAP कार्यकर्ताओं ने गाजियाबाद में भी एक शिकायत दर्ज कराई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी संयुक्त संगठन से जुड़े लोगों ने शहर के एमजी रोड पर रनौत का पुतला फूंका। इस दौरान उन्होंने वीर शहीदों का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान, कंगना रनौत मुर्दाबाद और कंगना रनौत को देश से बाहर करो जैसे नारे भी लगाए।

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