भारत में जैविक खेती समय की मांग , किसानों को होता है फायदा ही फायदा

भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखने में खेती एक अहम भूमिका निभाती है. भारत में खेती कई प्रकार से की जाती है पर वर्तमान समय में जैविक खेती भारत जैसे विशाल देश की मांग है. अगर हम बात करे कि जैविक खेती आखिर है क्या तो इसकी परिभाषा कुछ इस प्रकार दी जा सकती है. जैविक खेती, खेती की वह विधी है जिसमें रासायनिक खादों, कीटनाशकों का प्रयोग न कर गोबर, मिट्टी, खरपतवार और पत्तों से बनी खाद का प्रयोग कर खेती की जाती है.

जैविक खेती आज के समय की मांग है क्योकि कई वर्षों से खेती में अंधाधुंध तरीके से रासायनिक खादों का प्रयोग किया गया है जिसके कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर काफी नकारात्मक असर पड़ा है. मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने और पर्यावरण की दृष्टि से भी जैविक खेती आज के समय की मांग ही नहीं बल्कि जरूरत बन गई है. जैविक खेती मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के साथ – साथ पर्यावरण प्रदूषण पर भी नियंत्रण रखने में काफी मददगार है. जैविक खेती के कई अन्य फायदे भी है और सबसे बड़ी बात ये है कि इस खेती में किसानो को अधिक धन खर्च भी नहीं करना पड़ता है.

एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में पूरी दुनिया के 72.3 मिलयन हेक्टेयर क्षेत्र पर जैविक खेती की जाती थी. वर्तमान में जैविक खेती की क्षेत्र की संख्या में काफी वृद्धि हुई है और भारत में भी जैविक खेती के प्रति लोगों का उत्साह काफी अधिक देखने को मिला है. इसका सिर्फ एक ही कारण है और वो ये कि जैविक खेती हर प्रकार से लाभदायक है. सरकार की तरफ से भी किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और समय-समय पर कई तरह के कार्यक्रम चलाकर किसानों को जैविक खेती हेतु मदद भी पहुंचाई जा रही है.

भारत जैसे विशाल देश में जैविक खेती, कृषि का आधार बने इसके प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं ताकि मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहे और किसानों पर अधिक आर्थिक बोझ भी ना पड़े. हमारे देश में है जैविक खेती का लाभ भी किसानों को काफी अधिक मिला है और एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 विश्व में भारत से जैविक खाद उत्पाद का कुल निर्यात 6.39 लाख मैट्रिक टन रहा जो कि ये दर्शाता है कि जैविक खेती हर ओर से फायदेमंद है

भारत में जैविक खेती के प्रकार.

बात अगर भारत में जैविक खेती के प्रकार की करे तो भारत में तीन प्रकार से जैविक खेती की जाती है.

1. देशी खेती – ये जैविक खेती का एक प्रकार है जिसमें देसी जड़ी बूटियों के साथ गाय के गोबर से बने खाद कब प्रयोग किया जाता है. इसके साथ हैं जैविक खेती की इस विधि में जीवामृत का भी प्रयोग होता है ताकि फसलों की उत्पादन क्षमता पर कोई असर ना पड़े और मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी जस की तस बनी रहे.

2. कुदरती खेती  – खेती के इस प्रकार में पूरी तरह से प्राकृतिक नियमों का पालन किया जाता है. इस विधि के अनुसार खेत में एक ही फसल की बीज बोने के बाद फल या फसल की तोड़ लिया जाता है और इस प्रक्रिया को निरंतर दोहराया जाता है.

3. गौ आधारित खेती – जैसा कि इस खेती के नाम से ही स्पष्ट है कि इस खेती में गाय के अपशिष्ट पदार्थों का प्रयोग किया जाता है. कहने का अर्थ है कि इस खेती में गाय के गोबर और मूत्र से बने जीवामृत और मुख्य रूप से पंचगव्य तत्व का प्रयोग होता है. महत्वपूर्ण बात ये है कि इस खेती में खेत की जुताई में सिर्फ बैल का ही प्रयोग किया जाता है.

जैविक खेती से होने वाले लाभ

जैविक खेती से होने वाले लाभ को तीन भागों में बांटा गया है

1. किसानों को होने वाले लाभ –  जैसा कि हमने पहले भी इस बात का जिक्र किया कि जैविक खेती के कारण जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है जिससे फसलों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है. इसके अलावा जैविक खेती करने से सिंचाई के अंतराल में भी वृद्धि होती है. साथ ही जैसा कि जैविक खेती में रासायनिक कीटनाशकों रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं किया जाता है जिसके कारण किसानों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ता है. इसके फलस्वरूप इस तरह किसानों की आय में बढ़ोतरी दर्ज की जाती है.

2. मिट्टी को पहुंचता है फायदा – जैविक खेती से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में बढ़ोतरी तो होती ही है, साथ ही इसका एक फायदा ये है कि जैविक खेती के कारण भूमि में वाष्पीकरण कम होता है जिससे मिट्टी लंबे समय तक अपने अंदर पानी को धारण करने की क्षमता को बनाए रखती हैं.

3. पर्यावरण को पहुंचता है लाभ – जैविक खेती पर्यावरण की दृष्टि से काफी लाभदायक है. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इस खेती में कृत्रिम और रासायनिक रंगों के उपयोग नहीं किया जाता है जिससे जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण में कमी होती है. जैविक खेती में कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होने का एक और फायदा है और वो ये कि कीटनाशक दवाओं का उपयोग नहीं होने से केंचुए जैसे खेती के लिए मददगार जीवो का नाश नहीं होता है जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता निरंतर बनी हुई रहती है.

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