कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों में अब आ रही ये परेशानियां, अध्धयन में सामने आई कई बातें  

कोविड-19 के मामले अब भी देश में सामने आ रहे हैं। कोविड-19 अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है । कोरोना वायरस से  जंग  अभी जारी है। लेकिन इसी बीच कोविड-19 को हराकर ठीक हुए लोगों ने एक अध्धयन में जो बातें बताई है वो चौंकाने वाली हैं। दरअस, कोविड-19 के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हुए मरीज ठीक होने के 24 महीने के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं। कहा जा रहा है कि वैसे मरीज जो कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे, वें ठीक होने के बाद भी कोविड-19 से पहले की तरह जिंदगी नहीं जी पा रहे हैं।

दरअसल उन्हें 400 से 500 मीटर चलने पर ही थकान, सोने में दिक्कत, सांस फूलना, घुटनों में दर्द, जोड़ों में दर्द ,नींद कम आना जैसी समस्याएं सामने आ रही है। हाल ही में दिल्ली के एम्स अस्पताल द्वारा पोस्ट कोविड स्थिति को लेकर एक  चिकित्सीय अध्ययन पूरा किया गया है।  बात अगर इस स्टडी की करें तो  इस अध्ययन में डॉक्टरों ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर से संक्रमित देश के अलग-अलग हिस्सों से मरीज का चयन कर उनके दिनचर्या के बारे में जानने में कोशिश की।

कोरोना से ठीक हुए मरीजों की दिनचर्या को लेकर बातचीत के दौरान कई बातें सामने आई है। कोरोना से लड़कर ठीक हुए लोगों का जीवन अब बदल सा गया है। इस अध्धयन में शामिल लोगों का कहना है कि वें कोरोना से ठीक तो हो गए हैं लेकिन 8 घंटे की नौकरी कर पाना और पहले जैसा कार्य कर पाना उनके लिए मुश्किल सा हो गया है। बता दे की इस अध्धयन में विभिन्न राज्यों से 1800 से अधिक लोगों को शामिल किया गया।

ये अध्ययन एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया की निगरानी में किया गया है जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से कोविड-19 से लड़कर स्वस्थ हुए 1800 मरीज से बातचीत कर जानकारी जुटाई गई है। इस स्टडी के दौरान कुछ सवाल पूछे गए जिसमें 79.3 फ़ीसदी लोगों ने थकान, जोड़ों का दर्द, वातरोग, बाल का झड़ना, सांस फूलना और रात भर नींद नहीं आने की परेशानी बताई। इसको लेकर एम्स के डॉक्टरों ने भी अपनी राय रखी है।

एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग कोरना की चपेट में आने के बाद अस्पताल में दाखिल लिए थे उन्हें कई प्रकार की एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना पड़ा जिसके कारण भी यह समस्याएं सामने आई है। इस स्टडी में इस बात को भी कहा गया है कि पोस्ट कोविड की व्यापकता 12 सप्ताह में घटकर 12.8 फ़ीसदी दर्ज की गई है। साथी इस अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई है कि कोरोना रोधी टीके ने न सिर्फ लोगों में पर्याप्त एंटीबॉडी विकसित कर संक्रमण से बचाव किया है।

बल्कि जिन लोगों में पोस्ट कोविड की आशंका थी उनमे से 39 प्रतिशत में वैक्सीन के कारण लक्षण हावी नहीं हो पाया। बता दे कि कोरोना का टीका लेने के बाद कोरोना वायरस अब काफी नियंत्रण में आ गया है। हालांकि देश में कोरोना के मामले अब भी सामने आ रहें है पर जैसा की बड़ी संख्या में लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है तो अब कोरोना काफी हद तक नियंत्रण में आ गया हैं। 

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