एनआईएफ ने विकसित की मास्टिटिस का इलाज करने वाली पॉली-हर्बल दवा

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (विज्ञान एवम प्रौद्योगिकी मंत्रालय): वैज्ञानिकों ने मास्टिटिस का इलाज करने के लिए एक पॉली-हर्बल और सस्ती दवा विकसित की है। वैज्ञानिकों ने यह दावा गुजरात के किसान द्वारा साझा की गई स्वदेशी ज्ञान प्रणाली का उपयोग करते हुए विकसित की है। नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) द्वारा विकसित मस्तिरक जेल नामकी दवा का उद्योग भागीदार राकेश फार्मास्युटिकल्स के माध्यम से व्यवसायीकरण किया गया है।

इसे देश के विभिन्न भागों में पशुओं की दवाओं की आपूर्ति करने वाले मेडिकल स्टोर से खरीदा जा सकता है। बता दें मास्टिटिस एक आम संक्रामक बीमारी है, जो दूध की गुणवत्ता में गिरावट लाने के कारण कृषि उत्पादकता को प्रभावित करती है और इस प्रकार आय-सृजन गतिविधियों को भी प्रभावित करती है। इसके लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार का एक स्वायत्त संस्थान-एनआईएफ, ने किसानों के ज्ञान के आधार पर यह दावा विकसित की।

इस संस्थान ने गुजरात के किसान द्वारा साझा की गई इस अनूठी हर्बल संरचना की मवेशियों की इस बीमारी के नियंत्रण के लिए पहचान की है। श्री बेचारभाई समतभाई देवगनिया द्वारा साझा किए गए इस कम्पोजिशन के लिए एक पेटेंट भी दायर किया गया है। यह पाया गया कि सोमैटिक सेल काउंट (एससीसी) को यह दवा कम कर सकती है और दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार कर सकती है।

सोमैटिक सेल काउंट विश्व स्तर पर एक पैरामीटर है, और इसके मानक सीमा पर दूध में एससीसी कम करने के प्रयास ठीक हैं। पॉलीहर्बल दवा थन के लिए हानिकारक सूजन को कम करती है। स्वदेशी ज्ञान प्रणाली के इस महत्वपूर्ण विश्लेषण ने उद्योग भागीदार राकेश फार्मास्युटिकल्स की सहायता से मूल्य वर्धित वाणिज्यिक उत्पाद मस्तिरक को विकसित किया है।

यह कंपनी देश के विभिन्न हिस्सों में इस दवा का निर्माण और वितरण कर रही है। देश के आठ राज्यों- गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में डेयरी मालिकों को मस्तिरक-एंटीमास्टाइटिस हर्बल दवा का उपयोग करने से लाभ हुआ है। इसने एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कम कर दिया है और इस बीमारी काकम खर्च में इलाज करने में मदद की है। 

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