क्वांटम घटकों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है नया अध्ययन

नई दिल्ली, 21 जनवरी (इंडिया साइंस वायर): भौतिक विज्ञान में क्वांटम सिद्धांत और क्वांटम यांत्रिकी परमाणु कणों के व्यवहार से संबंधित है। भारतीय शोधकर्ता एक नये अध्ययन में 2डी ग्रैफेन में क्वांटम घटना को समझने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे रोमांचक अनुप्रयोगों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इलेक्ट्रॉन या विद्युदणु ऋणात्मक विद्युत आवेश युक्त मूलभूत उप-परमाणविक कण होते हैं, जो परमाणु में नाभिक के चारो ओर चक्कर लगाते हैं।

पारंपरिक इलेक्ट्रॉनों के मामले में, विद्युतीय प्रवाह केवल एक दिशा में प्रवाहित होता है, जो चुंबकीय क्षेत्र (‘डाउनस्ट्रीम’) द्वारा निर्धारित होता है। भौतिकविदों का कहना है कि कुछ सामग्रियों में प्रति-प्रसार चैनल हो सकते हैं, जहाँ कुछ अर्ध-कण विपरीत (‘अपस्ट्रीम’) दिशा में भी यात्रा कर सकते हैं। इन अपस्ट्रीम चैनलों में वैज्ञानिक व्यापक रुचि रखते हैं, क्योंकि वे विभिन्न नये प्रकार के क्वासिपार्टिकल्स धारण कर सकते हैं।

हालांकि, उनमें विद्युत प्रवाह नहीं होने कारण उन्हें पहचानना मुश्किल होता है। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलूरू के वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के साथ मिलकर अपस्ट्रीम मोड की उपस्थिति दर्शाने के लिए प्रमाण पेश किया है, जिसके साथ कुछ तटस्थ क्वासीपार्टिकल दो-स्तरित ग्रैफेन में चलते हैं। इन मोड या चैनलों का पता लगाने के लिए, शोधकर्ताओं ने आउटपुट सिग्नल में, ऊष्मा अपव्यय के कारण विद्युतीय शोर के उतार- चढ़ाव को नियोजित करने वाली एक नयी विधि का उपयोग किया है।

आईआईएससी द्वारा जारी वक्तव्य में शोधकर्ताओं ने बताया है कि क्वासिपार्टिकल्स नामक विजातीय गुणों को धारण करने वाले प्रभावी मंच के रूप में क्वांटम हॉल इफेक्ट घटना हाल के वर्षों में प्रमुखता से उभरकर आयी है। इसमें ऐसे गुण पाये जाते हैं, जो क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में रोमांचक अनुप्रयोगों को जन्म दे सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, जब 2डी सामग्री या गैस पर मजबूत चुंबकीय क्षेत्र प्रयुक्त किया जाता है,

तो इंटरफेस पर इलेक्ट्रॉन – समूह के भीतर मौजूद इलेक्ट्रॉन्स के विपरीत – किनारों, जिन्हें एज मोड या चैनल कहा जाता है, के साथ आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र होते हैं। यह गतिविधि, क्वांटम हॉल प्रभाव पर आधारित है, जो सामग्री और स्थितियों के आधार पर कई दिलचस्प गुणों को जन्म दे सकती है। आईआईएससी, बेंगलूरू के भौतिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर और नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन के शोधकर्ता अनिंद्य दास बताते हैं – “अपस्ट्रीम विक्षोभ (Excitation) चार्ज-न्यूट्रल हैं,

लेकिन वे ऊष्मीय ऊर्जा ले जा सकते हैं, और अपस्ट्रीम दिशा के साथ नॉइज स्पॉट उत्पन्न कर सकते हैं।” शोधकर्ता बताते हैं कि इलेक्ट्रॉन जैसे प्राथमिक कण एक-दूसरे के साथ या आसपास के पदार्थ से संपर्क में रहते हैं, तो क्वासिपार्टिकल्स व्यापक विक्षोभ पैदा करते हैं। ये वास्तविक कण नहीं हैं, लेकिन उनमें कण की तरह ही द्रव्यमान और आवेश होता है। इसका एक सरल उदाहरण ‘छिद्र’ है – एक रिक्ति, जहाँ किसी अर्धचालक में ऊर्जा की स्थिति में एक इलेक्ट्रॉन गायब होता है।

इसका इलेक्ट्रॉन के विपरीत आवेश होता है, और यह इलेक्ट्रॉन की तरह ही किसी पदार्थ के अंदर जा सकता है। इलेक्ट्रॉनों और छिद्रों के जोड़े भी क्वासिपार्टिकल्स बना सकते हैं, जो सामग्री के किनारे पर फैल सकते हैं। पूर्व अध्ययनों में, शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि ग्रैफेन में मेजराना फर्मियन जैसे आकस्मिक क्वासिपार्टिकल्स का पता लगाना संभव हो सकता है। इस तरह के क्वासिपार्टिकल्स को अंततः दोष-रहित क्वांटम कंप्यूटर बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

ऐसे कणों की पहचान और उनके अध्ययन के लिए, अपस्ट्रीम मोड का पता लगाना, जो उन्हें होस्ट कर सकते हैं, महत्वपूर्ण है। हालांकि, गैलियम-आर्सेनाइड आधारित प्रणालियों में इस तरह के अपस्ट्रीम मोड का पहले पता लगाया गया है, लेकिन अब तक ग्रैफेन और ग्रैफेन-आधारित सामग्री में इसकी पहचान नहीं की गई है, जो भविष्य के अनुप्रयोगों को सुनिश्चित कर सकती है। इस अध्ययन में, जब शोधकर्ताओं ने दो-स्तरित ग्रैफेन के किनारे पर विद्युत प्रभाव प्रयुक्त किया,

तो उन्होंने पाया कि ऊष्मा केवल अपस्ट्रीम चैनलों में ही पहुँचती है, और उस दिशा में कुछ “हॉटस्पॉट्स” पर फैल जाती है। अध्ययन में, यह भी पाया गया है कि अपस्ट्रीम चैनलों में इन क्वासिपार्टिकल्स की गति “बैलिस्टिक” थी और गैलियम-आर्सेनाइड आधारित प्रणालियों में पहले देखे गए “डिफ्यूसिव” परिवहन के विपरीत ऊष्मीय ऊर्जा बिना किसी नुकसान के एक हॉटस्पॉट से दूसरे में प्रवाहित होती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तरह की बैलिस्टिक हलचल से किसी बाह्य अवस्था और गुणों की उपस्थिति का भी संकेत मिलता है, जो भविष्य में ऊर्जा-कुशल और दोष-मुक्त क्वांटम घटकों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

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