अरुणाचल प्रदेश में स्थापित किया गया नया जैव प्रौद्योगिकी केंद्र

नई दिल्ली, 11 नवंबर (इंडिया साइंस वायर): राज्य में आदिवासी लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने में मदद करने के लिए अरुणाचल प्रदेश के सुदूर इलाके किमिन में एक नया जैव प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी उपकरणों का उपयोग करके स्थानीय जैव-संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग करना है। इसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समर्थित किया जाएगा।

सुविधा का उद्घाटन – जैव-संसाधन और सतत विकास केंद्र, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी; राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान; MoS PMO, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष, डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के विकास को विशेष प्राथमिकता प्रदान कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा, पिछले सात वर्षों में कृषि, जल विद्युत, बुनियादी ढांचा, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और साथ ही लंबवत एकीकृत खाद्य प्रसंस्करण श्रृंखला, विपणन, कौशल के विकास के माध्यम से विकास के नए रास्ते बनाने में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।  

मंत्री ने रेखांकित किया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग क्षेत्र के लिए विशिष्ट मुद्दों को संबोधित करने और स्थानीय समुदायों के लाभ के लिए कार्यक्रमों को लागू करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान करने के लिए क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इन कार्यक्रमों के कुशल कार्यान्वयन के लिए नए केंद्र का आईसीएआर और सीएसआईआर संस्थानों के साथ अकादमिक जुड़ाव होगा और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी। इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए सुविधाएं चार जिलों में स्थापित की जाएंगी, जिसमें 50 से अधिक गांव शामिल होंगे और अगले दो वर्षों में 10,000 से अधिक किसानों को लाभ होगा।

मंत्री ने कहा कि केंद्र तीन प्रमुख कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेगा: प्राथमिकता वाले आर्किड प्रजातियों के संरक्षण और गुणन के लिए अरुणाचल प्रदेश के चयनित जिलों में उपग्रह इकाइयों के साथ किमिन में एक अत्याधुनिक ऑर्किडेरियम की स्थापना, फाइबर निष्कर्षण की स्थापना और अरुणाचल प्रदेश के चयनित जिलों में प्रसंस्करण इकाइयां, और सुगंधित फसलों की खेती और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सुगंध इकाई का निर्माण।

केंद्र की स्थापना राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा की गई है। इसे शुरू में 3 साल की अवधि के लिए 54.23 करोड़ रुपये की लागत से 27 मार्च, 2018 को स्वीकृत किया गया था। परियोजना का कार्यकाल अब 26 सितंबर 2023 तक बढ़ा दिया गया है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम के दौरान अरुणाचल प्रदेश को जैव प्रौद्योगिकी में एक डीबीटी वित्त पोषित कौशल विज्ञान कार्यक्रम भी समर्पित किया। यह कार्यक्रम स्किल इंडिया मिशन के तत्वावधान में है। इसका उद्देश्य जीवन विज्ञान/जैव प्रौद्योगिकी में युवा स्नातकों के लिए व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से उन्हें कौशल प्रदान करके कैरियर पथ के विकास को सुविधाजनक बनाना है। 

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