भूलकर भी कभी ना लें किन्नरों की बद्दुआ, पछताना पड़ सकता है जिंदगी भर

हमारे समाज में किन्नरों को मंगलमुखी कहा जाता है। इसीलिए घर में कैसा भी शुभ अवसर जैसे शादी ,जन्म या अन्य किसी भी प्रकार के शुभ कामों में किन्नरों को सम्मान स्वरूप आमंत्रित कर इनसे आशीर्वाद लेते है। हकीकत में हमारा समाज विशेषकर सनातन धर्म हिन्दू धर्म में किन्नरों को बहुत ही अत्यधिक सम्मान दिया जाता है। इतना ही नहीं यह भी कहा जाता है कि किन्नर जिसको भी अपना आशीर्वाद दें, उसका भाग्य एकदम से चमक उठता है और जिसको भी बद्दुआ दे, उसके दुखों का फिर कोई अंत नहीं होता।

ऐसा कहा जाता है कि किन्नरों की बद्दुआ कभी नहीं लेनी चाहिए। लोग किन्नरों की बद्दुआ लेने से बहुत डरते हैं। ऐसा क्यों है। इसके पीछे की वजह शायद ही आप जानते होंगे। दरअसल, ऐसा माना जाता है कि किन्नरों की हाय हर हाल में लगती है। खास तौर पर आर्थिक मामले में इनकी बद्दुआ को बहुत गंभीर माना गया है। ऐसे लोग जीवन भर मुसीबत झेलते हैं और ऐसी भी मान्यता रही है कि कोई भी किन्नर किसी व्यक्ति को श्राप दे दें तो उसका विनाश होना सुनिश्चित है। 

किन्नर की दुआ क्यों है खास
किन्नर की दुआएं किसी भी व्यक्ति के बुरे समय को दूर कर सकती हैं माना जाता है कि इन्हें भगवान श्रीराम से वनवास के बाद वरदान प्राप्त हैं कहा जाता है कि इनसे एक सिक्का लेकर पर्स में रखने से धन की कमी भी दूर हो जाती हैं। किन्नरों की बद्दुआ इसलिए नही लेनी चाहिए क्योकिं ये बचपन से लेकर बड़े होने तक दुखी ही रहते हैं ऐसे में दुखी दिल की दुआ और बद्दुआ लगना स्वाभाविक हैं। 

कौन होते है किन्नर 
किन्नरों को भारत में हिजड़ा कहकर भी संबोधित जाता है। हालांकि देश में इन्हें थर्ड जेंडर का दर्जा बाकायदा सुप्रीम कोर्ट से मिल चुका है लेकिन अब भी ये मुख्यदारा से जुड़े हुए नहीं हैं। दफ्तरों में इन्हें काम नहीं मिलता या मिलता भी है तो भेदभाव से तंग होकर ये काम छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। किन्नरों को ना तो समाज में प्यार मिलता है और ना ही उनके परिवार वालों से, इसी वजह से किन्नर जीवन भर दुखी रहते हैं।

किन्नरों की शादी भी एक ही दिन के लिए होती है। किन्नर इरावन या अरावन नाम के देवता की पूजा करते हैं। किन्नर खुद को मंगल मुखी मानते हैं यानी मंगल कामों से जुड़ा हुआ। इसी वजह से अपने ही समुदाय के किसी सदस्य की मौत पर भी यह लोग नहीं रोते हैं। किसी की मौत होने के बाद पूरा हिजड़ा समुदाय एक हफ्ते तक भूखा रहता है। किन्नरों के बारे में अगर सबसे गुप्त कुछ रखा गया है, तो वो है इनका अंतिम संस्कार।

जब इनकी मौत होती है, तो उसे कोई आम आदमी नहीं देख सकता। इसके पीछे की मान्यता ये है कि ऐसा करने से मरने वाला फिर अगले जन्म में किन्नर ही बन जाता है। इनकी शव यात्राएं रात में निकाली जाती है। शव यात्रा निकालने से पहले शव को जूते और चप्पलों से पीटा जाता है। इनके शवों को जलाया नहीं जाता, बल्कि दफनाया जाता है।

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