6 घंटे या उससे कम कभी न सोयें अधेड़ उम्र के लोग, सबसे ज्यादा इनमें ही होता है डिमेंशिया का खतरा

यदि आपकी उम्र 40 से 50 वर्ष के बीच है और 6 घंटे से कम नींद ले रहे हैं तो आप डिमेंशिया (पागलपन) के शिकार हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ( यूसीएल ) के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में यह बात बताई है। वैज्ञानिकों
द्वारा 10 हजार अधेड़ उम्र के लोगों पर अध्ययन किया गया जिसमें यह पता चला है कि 50 से 70 की उम्र के ऊपर के लोगों की तुलना में 40 से 50 साल की उम्र वाले अधेड़ लोगों को डिमेंशिया का खतरा 30 फीसदी ज्यादा है।

यूसीएल के किए गए इस अध्ययन के माध्यम से वैज्ञानिकों ने बताया कि अधेड़ उम्र के वैसे लोग जो 6 घंटे या उससे
कम सोते हैं उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा ज्यादा होता है और इससे बचने का सिर्फ एक ही उपाय है कि वो सात घंटे
कम से कम जरूर सोयें। क्योंकि 50 साल के ऊपर के लोगों की तुलना में अधेड़ उम्र के लोगों को डिमेंशिया का खतरा
30 फीसदी ज्यादा पाया गया। अधेड़ उम्र के व्यक्ति यदि सात घंटे से कम सोते हैं तो उन्हें दिल और पेट संबंधी
बीमारियां का भी खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा असर पड़ता है। डिमेंशिया के
मरीजों को नींद नहीं आने की समस्या हो जाती है, इसलिए अधेड़ उम्र के लोगों को पूरी नींद जरूर लेना चाहिए।

वैज्ञानिकों ने बताया कि पूरी नींद लेने से दिमाग में बनने वाले जहरीले पदार्थ नस्ट हो जाते हैं किंतु जब लोग पूरी नींद
नहीं लेते हैं तो उनके दिमाग की यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता
है। डॉ. सेवेरिन साबिया ने अपने स्टडी में यह बताया कि यदि आपकी उम्र 40 से 50 के बीच है और आप नींद पूरी नहीं
लेते हैं तो बढ़ते उम्र के साथ डिमेंशिया का खतरा बढ़ने लगता है। डॉ. सेवेरिन और उनकी टीम के द्वारा 10 हजार
ब्रिटिश वॉलंटियर्स पर यह अध्ययन किया गया। वहीं इस स्टडी में फ्रांस के 8000 लोग खुद से शामिल हुए। इनमें से
कुछ तो ऐसे भी लोग थे, जो अपनी नींद का रिकॉर्ड रखने के लिए हेल्थ बैंड का भी प्रयोग करते थे। वैज्ञानिकों की मानें
तो यह स्टडी 1985 से शुरू की गई थी।

यदि आप पूरी नींद नहीं लेते हैं तो बॉडी मास इंडेक्स और स्लीप एप्निया मिलकर सोते समय सांस लेने की प्रक्रिया को
बाधित कर देते हैं जिससे कोई भी व्यक्ति आधी नींद में जग जाता है और फिर उसे नींद नहीं आती है। यह स्थिति
गंभीर भी हो जाती है और सोते समय आपकी सांस अटक सकती है जिससे सांस फूलने लगती है। कभी-कभी आप
झटके से जागते हैं जिससे दिल से संबंधी गंभीर बीमारी हो सकती है। इस वजह से दिल की नसों में फैट बढ़ने का
खतरा बढ़ जाता है।

डॉ. सेवेरिन ने कहा कि ज्यादा शराब पीने, धूम्रपान करने और मोटापा से भी डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है। यह
समस्या 65 साल से ज्यादा उम्र के हर 14 में से 1 व्यक्ति को यह समस्या होती है। वहीं 80 साल से ज्यादा उम्र के
लोगों को हर 14 में से 6 लोगों को यह शिकायत होती है। इसकी वजह से अलजाइमर या वैस्कुलर डिमेंशिया होने का
खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे लोगों को नींद जरूर पूरी करनी चाहिए। जब भी नींद आए तो मरीज को सो जाना
चाहिए और तब तक सोना चाहिए जब तक शरीर खुद न जागने को कहे।

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