महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी पर लगाया कश्मीर में लोकतंत्र कुचलने का आरोप, कहा – वोट की खातिर कश्मीरी पंडितों के दर्द को हथियार बना रही बीजेपी

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (People’s Democratic Party) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने रविवार को बीजेपी पर जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को कुचलने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार अफगानिस्तान को समावेशी सरकार और मानवाधिकारों पर उपदेश देती है और कश्मीर में लोगों को जेल में डाला जाता है, संवैधानिक अधिकारों की मांग के लिए देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाता है।

मुफ्ती ने कहा कि, कश्मीर में बीजेपी के लिए समावेश का मतलब केवल उन लोगों के लिए होता है जो इसके हिसाब से चलते हैं और इसके एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि बीजेपी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में बहुसंख्यकवाद को कैसे लागू कर रही है। कैसे पार्टी दुनिया को लोकतंत्र, मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों पर उपदेश दे रही है और ये कैसे जम्मू-कश्मीर में मानवीय मूल्यों एवं लोकतंत्र को कुचल रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर वोट की खातिर कश्मीरी पंडितों के दर्द को हथियार बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कश्मीरी मुसलमानों को इस बात के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी कि हिंदू बंधुओं की मर्यादापूर्ण वापसी हो। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ लोग दिल्ली में स्टूडियो में बैठकर इस समुदाय (कश्मीरी पंडितों) का प्रतिनिधि होने का दावा करते हैं और विषवमन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग घाटी में पंडितों एवं मुसलमानों के बीच सहमति बिंदु तक बात नहीं पहुंचने दे रहे हैं।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीरी पंडित इतने लंबे समय से अपने घरों से बाहर हैं और लौटना चाहते हैं, लेकिन प्रश्न है कि ये कैसे हो। बीजेपी ने जिस तरीके से इस मुद्दे को अपनाया है, वो दोनों समुदायों (पंडितों और मुसलमानों) को साथ लाने के बजाए उनके बीच और विभाजन पैदा करने जैसा है।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी मुसलमान पंडितों के पलायन से नुकसान में हैं और उन्हें उनकी वापसी सुनिश्चित करनी है, ऐसे में लोगों खासकर नई पीढ़ी पर ये जिम्मेदारी आती है कि एक-दूसरे के करीब आएं और 1990 में आंतकवाद उभरने से पहले के भाईचारे वाले माहौल को बनाने के लिए काम करें।

पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को एक सुर में अपनी बात रखने और उन निहित स्वार्थी तत्वों को खारिज करने की जरूरत है जो इस विभाजन को और बढ़ाने के लिए विषवमन कर रहे हैं। शायद हमको (कश्मीर के मुसलमानों) उनकी गरिमामय वापसी सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़े मुफ्ती ने कहा कि सरकार के पास ऐसी सूचना होती है कि पंडितों पर हमला हो सकता है, उसके बावजूद चुनिंदा हत्याएं हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि चुनिंदा हत्याओं से घाटी में कार्यरत पंडित कर्मचारियों में असुरक्षा का बोध पैदा हुआ है और वो घबराकर घाटी छोड़ने का मजबूर हो रहे हैं। चीजें इतनी गड़बड़ हो गई हैं कि सरकार भ्रमित हो गई है और ये इस बात से साबित होता है कि कभी वो ऐसे कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए कहती है तो कभी उन्हें (जम्मू में ही) बने रहने को कहती है। बता दें इन दिनों मुफ्ती पांच दिवसीय जम्मू के दौरे पर है।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending