कई घातक रोगो से बचा जा सकता है अनुलोम विलोम, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम का दैनिक अभियास से!

कहते हैँ- “स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ी संपत्ति है| हमारे देश भारत मे प्राचीन काल से ही योग और स्वास्थ एकदूसरे से सम्बंधित माने गए हैँ| इन दोनों के बीच सम्बन्ध की व्यथा भिन्न भिन्न शब्दों मे की जाती रही है|

 गीता के अनुसार योग एक तकनीक है जिसके अभ्यास के द्वारा स्वस्थ संगयरधन कियाजा सकता हैस्वास्थ एक सकारात्मक अवधारणा है, सकारात्मक स्वास्थ का अभिप्राय केवल रोग से मुक्त होना ही नहीं होता हैबल्कि इसमें आक्रमण करने वाले विशिष्ट कारको के लिए प्रतिरोधक क्षमता एवं रोगों के लिए समुचित मात्रा मेप्रतिरक्षा के विकास के साथ साथ स्वस्थ होने की ऊर्जावान एवं उल्लासपूर्ण अनुभूति भी शामिल हैबहुत से आधुनिक एवं देसी तरीके और विषय विरोध हैँ जो रोगों का सफलता पूर्वक सामना करने मे हमारीसहायता कर सकते हैँ| 

स्वास्थ के बारे मे योग कीअपनी अवधारणा है जिसे वैज्ञानिक रूप भी समझ गया है तथा बहुत लोगो के द्वारा प्रस्तुत किया गया है| यदि योग को विद्यालयी स्तर पर आरम्भ किया जाता है तो यह अच्छे स्वास्थ को प्राप्त करने के लिए और स्वस्थ जीवन शैली के विकास के लिए सहायक होगी स्वामी रामदेव जी ने योग के महत्व को  पुरे विश्व मे प्रकाशित किया है| योग ने अनेक लोगो को जीवन प्रदान किया है|

अनुलोम विलोम, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम आदि के माध्यम से कई घातक रोगों से बचा जा सकता है| यदि हर व्यक्ति योग को नियंत्रित रूप से करेगा तो वह स्वस्थ ही स्वस्थ रहेगा |


क्योंकि योग साधना के बहुत सारे प्रकार हैं, किसी के लिए भी शुरू करना संभव है। चाहे आपका शरीर पहले से लचीला हो या फिर भारी हो, वह किसी भी शैली का हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हर शैली में हर योगमुद्रा और शुरुआती कक्षाओं के लिए संशोधन हैं,” योग आपके शरीर और आपके आंतरिक मन से अनुरूप होने का

एक शानदार तरीका है। ” 

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