ममता दीदी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ‘वैक्सीन, रेमडेसिविर, और ऑक्सीजन की मांगी मदद’

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांगी मदद। ममता बनर्जी ने कोरोना वैक्सीन, रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब इंजेक्शन तथा ऑक्सीजन की जल्द से जल्द सप्लाई देने का अनुरोध किया है। ममता ने पीएम मोदी को पत्र लिख, वैक्सीन की 5.4 करोड़ डोज की सप्लाई की मांग की हैं। इसके साथ ही उन्होंने रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की नियमित आपूर्ति का भी पीएम मोदी से अनुरोध किया है।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी लगातार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल खड़े करती रही हैं।रविवार को भी एक रैली के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा, “देश में रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कमी है। आज हमारे देश में कोई दवा नहीं है लेकिन 80 देशों में दवाएं भेजी गईं। आप दवाएं भेज रहे हैं तो मुझे कोई समस्या नहीं है लेकिन पहले अपने राष्ट्र को उपलब्ध कराएं। आप अपना नाम गौरवान्वित करने के लिए ऐसा कर रहे हैं।”

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी लिख चुके है प्रधानमन्त्री मोदी को चिट्ठी
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी में वैक्सीनेशन को तेज करने का सुझाव दिया था। इसके साथ ही मनमोहन सिंह ने लिखा था की, 45 साल से कम उम्र के लोगों को भी टीकाकरण की छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि कितने लोगों को टीका लगा है, यह आंकड़ा ना देखकर हमें इस पर फोकस करना चाहिए कि आबादी के कितने फीसदी लोगों को टीका लगा है।
मनमोहन सिंह कहा, सबसे पहले सरकार को अगले छह महीने के लिए टीकों के दिए गए ऑर्डर, किस तरह से टीके राज्यों के बीच वितरित होंगे, इस बारे में बताना चाहिए। उन्होंने कहा, ”सरकार को यह बताना चाहिए कि अलग-अलग वैक्सीन उत्पादकों को कितने ऑर्डर दिए गए हैं, जिन्होंने अगले छह महीने में डिलीवरी का वादा किया है. यदि हम लक्षित संख्या में लोगों को टीका लगाना चाहते हैं तो हमें अडवांस में पर्याप्त ऑर्डर देने चाहिए ताकि उत्पादक समय से आपूर्ति कर सकें।”
इसके साथ ही सरकार को यह बताना चाहिए कि इन संभावित टीकों का वितरण राज्यों के बीच किस तरह पारदर्शी फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा। केंद्र सरकार 10 फीसदी आपातकालीन जरूरत के लिए रख सकती है, लेकिन बाकी का राज्यों को साफ सिग्नल मिले ताकि वे उस तरह टीकाकरण की योजना बना सकें।
चिट्ठी में मनमोहन सिंह ने लिखा कि, राज्यों को यह छूट दी जाए कि वे फ्रंटलाइन वर्कर्स की कैटिगरी तय करें, जिन्हें 45 साल से कम उम्र के बावजूद टीका लगाया जा सके उदाहरण के तौर पर राज्य स्कूल टीचर, बस, थ्री व्हीलर और टैक्सी ड्राइवर्स, म्यूनिसिपल और पंचायत कर्मियों और वकीलों को टीका लगाना चाहेंगे। 45 साल से कम उम्र के बावजूद इन्हें टीका लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ” पिछले कुछ दशकों में भारत सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक के रूप में उभरा है अधिकांश क्षमता निजी क्षेत्र में हैं जनस्वास्थ्य के लिए मौजूदा आपात स्थिति में भारत सरकार को वैक्सीन उत्पादकों को मदद देनी चाहिए, ताकि वे तेजी से मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार कर सकें. इसके लिए कंपनियों को फंड और छूट देने की सलाह दी”
इसके साथ ही मनमोहन सिंह ने कहा कि वैक्सीन के घरेलू आपूर्तिकर्ता सीमित हैं, इसलिए ऐसे किसी भी टीके जिसे यूरोपीय मेडिकल एजेंसी या यूएसएफडीए ने मंजूरी दी हो, देश में आयात की मंजूरी देनी चाहिए। इसके लिए देश में ट्रायल के बिना ही उन्हें मंजूरी देनी चाहिए आपात स्थिति में यह छूट न्यायोजित है।

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