आकाशीय बिजली: एक प्राकृतिक आपदा

Navneet Kumar : हर साल बारिश के मौसम के दौरान देश में सैंकड़ों लोगों की मौत आकाशीय बिजली गिरने के कारण हो जाती है।
आकाश में चमकने वाली बिजली को तड़ित या वज्रपात कहते हैं। प्रकृति की सबसे रोमांचक घटना अकाशीय बिजली है। जिसकी चमक और गर्जना रोमांचित कर देती है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हर साल लगभग 2.5 करोड़ बिजलियाँ धरती पर गिरती हैं। इस प्रकार हर सेंकड ऐसी 100 घटनाएं घटित होती हैं। साधारणतया इनका औसत तापमान सूर्य के सतही तापमान से लगभग पांच गुना अधिक लगभग (27,0000 डिग्री सेल्सियस) होता हो सकता है। ध्यान रहे सूर्य का सतही तापमान लगभग 5505 डिग्री सेल्सियस होता है।
पहली बार विज्ञान की नजर से इसे समझने का प्रयास मशहूर वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन ने किया था। उन्होंने ही बिजली चमकने के पीछे के कारणों को समझाने की कोशिश की थी। उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला था कि बिजली चमकना वास्तव में एक प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज है। इसके लिए उन्होंने 1752 में ‘पतंग वाला प्रयोग’ किया था।
वैज्ञानिक सरल शब्दों में आकाशीय बिजली को ठंडी और गर्म बिजली में बांटते हैं। ‘ठंडी’ बिजली से अभिप्राय कम समय (लगभग सेकेंड के हजारवें भाग) तक चमकने वाली बिजली से है जबकि ‘गरम’ बिजली का अर्थ कहीं अधिक देर अर्थात सेकेंड के दसवें भाग तक चमकने वाली बिजली से है। इसके अलावा गरम बिजली की तुलना में ठंडी बिजली ज्यादा विस्फोटक गर्जना करती है।
कुछ लोगों का कहना है कि ऐसा हो सकता है कि बर्फ के कण जब आपस में टकराते हैं तो उनमें इलेक्ट्रिकल चार्ज आ जाते हैं और बर्फ के छोटे कण में आमतौर पर पॉजिटिव चार्ज यानी धनात्मक आवेश आने की संभावना रहती है जबकि बड़े कणो में निगेटिव चार्ज यानी ऋणात्मक आवेश की।
जैसे-जैसे छोटे कण कन्वेक्शन करंट के कारण ऊपर उठने लगते हैं वैसे-वैसे बड़े कण गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठने लगते हैं । इस तरह विपरीत आवेश यानी अपोजिट चार्ज वाले पार्टिकल एक दूसरे से अलग होने लगते हैं और विद्युत क्षेत्र यानी इलेक्ट्रिकल फील्ड तैयार जाता है।
बिजली कड़कने से यह फील्ड डिस्चार्ज हो जाता है दरअसल यह आवेशित हो चुके बादल और पृथ्वी के बीच बहुत बड़ी चिंगारी की तरह होता है यह आज भी रहस्य से हुआ है कि यह चिंगारी पैदा कैसे होती है? असल में तूफानी बादलों में विद्युत आवेश पैदा होता है जिससे इनकी निचली सतह ऋणावेशित और ऊपरी सतह धनावेशित होती है, जिससे जमीन पर धनावेश पैदा होता है। बादलों और जमीन के बीच लाखों वोल्ट का विद्युत प्रभाव उत्पन्न होता है। धन और ऋण एक-दूसरे को चुम्बक की तरह अपनी-अपनी ओर आकर्षित करते हैं, किन्तु इस क्रिया में वायु बाधा बनती है क्योंकि वायु विद्युत की अच्छी संवाहक नहीं होती है जिससे विद्युत आवेश में रुकावटें आती हैं और बादल की ऋणावेशित निचली सतह को छूने की कोशिश करती धनावेशित तरंगें पेड़ों,
पहाड़ियों, इमारती शिखरों, बुर्ज, मीनारों और राह चलते लोगों आदि पर गिरती हैं।
हम जानते हैं कि प्रकाश की गति 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकेंड होती है, इसलिए बिजली की चमक हम तत्काल देख सकते हैं। लेकिन ध्वनि की गति प्रकाश की गति से कम होती है। इसलिए हमें पहले चमक दिखाई देती है और गर्जन की आवाज बाद में सुनाई देती है। गर्जन सुन बिजली चमकने वाले स्थान का पता लगाएं ध्वनि लगभग तीन सेकेंड में एक किलोमीटर चलती है। चमक देखने के बाद सेकेंड गिनने लगिए। गरज सुनने पर गिनती बंद कर दीजिए। सेकंडों को तीन से भाग देकर आप पता लगा सकते हैं कि बिजली कितनी दूर चमकी है।
अगर खराब मौसम में आपने आकाशीय बिजली गिरते हुए देख रहे हैं तो बिजली आप पर नहीं गिरेगी, क्योंकि वज्रपात की रफ्तार लगभग प्रकाश की गति के समतुल्य होती है लिहाजा आप अपने ऊपर बिजली गिरते हुए तो कभी भी नहीं देख सकते हैं।

आकाशीय ​बिजली को प्रभावित करने वाले कारक इसके अलावा आकाशीय बिजली को प्रभावित करने वाले कारकों में पर्वत भी शामिल हैं भारत के उत्तर—पूर्वी क्षेत्र में आकाशीय बिजली पर पर्वतीय प्रभाव भी देखा गया है। इसके कारण पहाड़ी घाटियों की नमी को रात में मेघ गर्जन और बिजली वाला तूफ़ान की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार माना गया है। यही कारण है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आकाशीय बिजली के कड़कने की दर बहुत अधिक होती है।
आईआईटीएम के वैज्ञानिक सुनील पंवार के जानकारी दी कि ”पुणे के साथ-साथ पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के ऊपर तूफानी बादलों के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि इस क्षेत्र में बर्फली सांद्रता को बनाए रखने के लिए बादलों के निचले हिस्से में विशाल मात्रा में बफीले नाभिक की सांद्रता धनात्मक आवेश को निर्मित करती है।”
तड़ित चालक अक्सर आप लोगों ने ईमारतों पर एक धातु की छड़ देखी होगी। असल में यह बिजली से बचाव के लिए लगाए जाने वाला ​तड़ित चालक होता है। बेंजामिन फ्रैंकलिन द्वारा ही सबसे पहले तड़ित चालक बनाए गए थे। आरंभ में इन्हें फ्रैंकलिन छड़ भी कहा जाता था। तड़ित चालक (Lightening rod or lightening conductor) एक धातु का चालक छड़ होती है जिसे ऊँचे भवनों की आकाशीय विद्युत से रक्षा के लिये लगाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार
उंचे भवनों में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए पर्याप्त तैयारी होनी चाहिए। तड़ित चालक ऐसे उपायों में से सबसे सरल और अच्छा तरीका है।
आपदा से बचाव के लिए सावधानियां

  1. बिजली कड़कने के वक्त आप पेड़ के नीचे न जाएं और हो सके तो घर में ही रहें।
  2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल बंद कर दें।
  3. अगर किसी पर बिजली गिर जाए, तो तुरंत डॉक्टर की मदद माँगे। ऐसे लोगों को छूने से आपको कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा।
  4. अगर किसी पर बिजली गिरी है तो फ़ौरन उनकी नब्ज़ जाँचे और अगर आप प्राथमिक उपचार देना जानते हैं तो ज़रूर दें।
  5. बिजली गिरने से अकसर दो जगहों पर जलने की आशंका रहती है वो जगह जहाँ से बिजली का झटका शरीर में प्रवेश किया और जिस जगह से उसका निकास हुआ जैसे पैर के तलवे पर।
  6. ऐसा भी हो सकता है कि बिजली गिरने से व्यक्ति की हड्डियाँ टूट गई हों या उसे सुनना या दिखाई देना बंद हो गया हो। इसलिए ऐसी बातों की जाँच करना चाहिए।
  7. बिजली गिरने के बाद तुरंत बाहर न निकलें। अधिकाशं मौतें तुफ़ान के गुज़र जाने के 30 मिनट के बाद तक बिजली गिरने से होती हैं।
  8. अगर बादल गरज रहे हों, और आपके रोंगटे खड़े हो रहे हैं तो ये इस बात का संकेत है कि बिजली गिर सकती है। ऐसे में नीचे दुबक कर पैरों के बल बैठ जाएँ, अपने हाथ घुटने पर रख लें और सर दोनों घुटनों के बीच। इस मुद्रा के कारण आपका ज़मीन से कम से कम संपर्क होगा.
  9. छतरी या मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल न करें। धातु के ज़रिए बिजली आपके शरीर में घुस सकती है।
  10. विशेषज्ञों के अनुसार उंचे भवनों में आकाशीय बिजली से बचाव के लिए पर्याप्त तैयारी होनी चाहिए।

More articles

- Advertisement -
Web Portal Ad300x250 01

ताज़ा ख़बरें

Trending