तालिबानी शासन में महफूज नहीं एलजीबीटी समुदाय, मंडरा रहा है मौत का खतरा

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही वहां पर खूनी नरसंहार शुरू हो चुका है। लोग वहां से जान बचाकर भागने को मजबूर है। इस बीच सिर्फ महिलाएं ही नही एलजीबीटी समुदाय भी पल पल खौफ के साए में जीने को मजबूर है। अफगानिस्तान में गे या लेस्बियन लोगों के लिए जिंदगी पहले ही बहुत मुश्किल थी। तालिबान शासन के लागू होने के बाद तो यह जानलेवा जैसा हो गया है। इस बात की जानकारी खुद एक गे छात्र ने दी है।

एक गे अफगान छात्र के मुताबिक, तालिबान की बढ़ती हिंसा को देखते हुए अब वह यहां से भाग जाने का मन बना रहा है। हालांकि वह यहां से निकल जाएगा, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। वजह, यहां से भागने के लिए काबुल एयरपोर्ट तक पहुंचना जरूरी है, लेकिन तालिबान उसे वहां तक पहुंचने देंगे यह बात बहुत कठिन नजर आती है।

उसके मुताबिक, वह किसी भी देश जा सकता है, लेकिन यहां नहीं रह सकता। नाम न छापने की शर्त पर गे छात्र ने कहा कि इस देश से भाग जाना ही सबसे बेहतर विकल्प है। अगर उसे वीजा मिलता है और किसी देश में रहने की परमिशन मिलती है तो वह सबकुछ छोड़कर भाग जाना चाहेगा। अब हमारे लिए यहां रहने का कोई मतलब नहीं रह गया है। 

इस बीच कनाडा ने गे, लेस्बियन या ट्रांसजेंडर अफगान शरणार्थियों को अपने यहां शरण देने पर विचार करने को कहा है। उसने कहा है कि एलजीबीटी लोगों के प्रति लोगों के मन में बहुत ज्यादा नकारात्मकता है। इसके चलते इस समुदाय से जुड़े लोगों में अपनी सुरक्षा और पहचान को लेकर बहुत ज्यादा असुरक्षा है। जबकि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी हो चुकी है, इस बात का अंदाजा लगाना कठिन नहीं कि हालात और मुश्किल होंगे।

दूसरी तरफ ब्रिटेन ने 5000 अफगान नागरिकों को अपने यहां शरण देने की घोषणा की है। इसमें महिलाओं, लड़कियों और धार्मिक व अन्य माइनॉरिटी के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। लेकिन यहां पर भी अफगान एलजीबीटी समुदाय के लोगों के लिए कोई आश्वासन नहीं मिला है। वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं जो किसी भी अफगान नागरिक को अपने यहां शरण देने के इच्छुक नहीं हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, टर्की और ईरान जैसे देश शामिल हैं। 

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